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कलम की विनम्रता

मनोज कुमार
   तीस मई को हिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाते हैं। ये दिवस बेहद अर्थवान हैं, खासकर पत्रकारिता के लिये। यहां मैं मीडिया शब्द से परहेज करने की कोशिश करूंगा क्योंकि मेरा मानना है कि मीडिया का अर्थ पत्रकारिता से एकदम जुदा है। बहरहाल, हम पत्रकारिता के संदर्भ में बात करेंगे।  दादा माखनलाल की विष्व प्रसिद्व रचना है पुषप  की अभिलाषा । इस कविता में उन्होंने फूल की विन्रमता का बखान किया है और इससे जुड़ी बात कलम की मैं कहता हूं। कलम भी आपको विनम्रता सिखाती है। आप देखेंगे कि आमतौर पर कलम नीचे की तरफ होती है अर्थात वह विनम्र है। पत्रकारिता भी विनम्रता सिखाती है और विनम्र पत्रकारिता ही दुनिया बदलने की ताकत रखती है। तलवार नीचे की तरफ होगी तो वह भीरूपन का परिचायक होगी किन्तु कलम ऊपर की तरफ होगी तो उसकी अकड़ दिखेगी। क्या कलम अकड़ दिखा सकती है? नहीं, कभी नहीं। कलम की प्रकृति रचने की है, सिखाने की है और रचियता हमेषा विनम्र होता है। जो लोग आस्तिक नहीं हैं वे भी इस बात को मानेंगे कि ईष्वर, अल्लाह, ईषु, गुरूनानक किसी ने भी, कहीं भी विनयशील व्यवहार के अलावा कोई सीख नहीं दी है। 
जब हम यह मानते हैं कि …