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आत्मनिर्भर महिलाओं की नईदुनिया

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अनामिका
महिलाएं आत्मनिर्भर कैसे होती हैं? इसका जीता-जागता मिसाल देखना है तो आपको छत्तीसगढ़ आना पड़ेगा. एक नगर, एक कस्बा या एक गांव में एक आत्मनिर्भर महिला की संख्या आप अंगुलियों पर नहीं गिन पाएंगे. कहीं पूरा का पूरा गांव महिलाओं के आत्मनिर्भरता की पहचान बन गया है तो कहीं समूह आत्मनिर्भर है. कुछ ऐसी जगह भी है जहां अपने हुनर के बूते छत्तीसगढ़ से पार जाकर स्वयं के जीवन को खुशहाल बना लिया है। इन सबकी दास्तां सुनने और सुनाने के लिए वक्त चाहिए. आज हम एक छोटी सी कहानी में इनकी सफलता से आपका परिचय कराते हैं। इन सफलताओं की कड़ी में पहला नाम है एक छोटे से गांव जिगयिा की कुमारी सनेश्वरी.  सनेश्वरी पहाड़ी को लाईवलीहुड कॉलेज बलरामपुर ने गारमेन्ट मेकिंग में तराश कर हुनरमंद बनाया और आज वह फ्रांनटीयर निटर प्राईवेट लिमिटेड तिरूपुर तमिलनाडु में 8500 रूपये प्रति माह वेतन के साथ आवासीय सुविधा भी मिल रही है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के विकासखण्ड कुसमी के ग्राम जिगनिया की रहने वाली 20 वर्षीय कुमारी सनेश्वरी पहाड़ी कक्षा 11वीं तक पढ़ी है। पेशे से किसान पिता भगचंद गांव में रहकर खेती किसानी करते हैं और किसी तरह…