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मैं मध्यप्रदेश हूं..

मनोज कुमार  मैं मध्यप्रदेश हूं...हिन्दुस्तान का ह्दय प्रदेश... मेरी पहचान है ... सतपुड़ा के घने जंगल...कल...कल कर बहती नर्मदा, ताप्ति, चंबल, बेतवा जैसी जीवनदायिनी नदियां...मेरी पहचान है अकूत खनिज सम्पदा...लौह, अयस्क, तांबा, जस्ता और हीरा...मैं एक प्रदेश ही नहीं हूं...एक परम्परा हूं...जीहां सर्वधर्म और समभाव की परम्परा का प्रदेश...आज ही के दिन अर्थात एक नवम्बर को मेरा जन्म हुआ था...साल उन्नीस सौ छप्पन में जब मुझे मध्यप्रदेश का नाम मिला तब मैं भारत के सबसे बड़े भूभाग वाला प्रदेश हुआ करता था...झाबुआ से लेकर बस्तर तक मेरी धडक़न महसूस की जा सकती थी...सन् दो हजार तक मैं भारत देश का इकलौता सबसे बड़ा भूभाग वाला प्रदेश था...इसी दिन मेरे जन्म के साथ मेरा विघटन भी हो गया...मुझसे अलग कर छत्तीसगढ़ को स्वतंत्र राज्य का दर्जा मिल गया...
चवालीस साल पहले जब मेरा जन्म हुआ था... तब मैं आज की तरह सुडौल नहीं था...न ही मेरी विकास की कोई कहानी थी...मैं बिखरा बिखरा सा था...मेरा निर्माण विंध्य, मध्यभारत, भोपाल रियासत एवं महाकोशल को मिलाकर हुआ...स्वप्रदृष्टा पंडित रविशंकर शुक्ल के हाथों मेरा पहले-पहल लालन-पालन …