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अब नहीं होगी उनकी जिंदगी धुंआ-धुंआ...

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अनामिका  भिनसारे उठ जाना और स्नान-ध्यान कर परिवार के लिए रोटी पकाना पलकमती के लिए उतना कष्टसाध्य नहीं था जितना कि रोज-रोज धुंआ होती जिंदगी. चूल्हे पर भोजन पकाना उसकी रोजमर्रा की जिंदगी का काम है लेकिन इस रोजमर्रा के काम में उसकी जिंदगी के एक-एक कर जिंदगी खत्म होती जा रही थी. चूल्हे से निकलता धुंआ उसके सांसों के साथ उसके जिस्म को खाया जा रहा था. मुसीबत तब और बढ़ जाती थी जब बारिश के दिनों में गीली लकडिय़ां सुलग नहीं पाती और पूरी ताकत लगाकर वह उन्हें सुलगाने की कोशिश करती. आज का दिन पलकमती के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है. मुख्यमंत्री रमनसिंह उन्हें उज्जवला योजना के तहत गैस चूल्हा दे रहे हैं. पलकमती की पलकें चमकने लगी है तो इस कतार में और भी महिलायें हैं जिनकी जिंदगी पलकमती से अलग नहीं थी. उनके घरों में भी गैस चूल्हा आ गया है और उनकी जिंदगी धुंआ-धुंआ होने से बच जाएगी. एक-दो पांच नहीं बल्कि बड़ी संख्या में वो महिलाएं हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर थीं और जिनके लिए गैस कनेक्शन प्राप्त कर लेना सपना था. इन सभी के सपने सच करने के लिए राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री के वायदे को पूरा करने के लिए जुट गयी ह…