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January 24, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

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जन्मदिन पर विशेष
लक्ष्मीकांतजी को जन्मदिन मुबारक
मनोज कुमार
बात लगभग डेढ़ साल पुरानी होगी। भोपाल में पत्रकारिता की कुछ किताबों का विमोचन था। इन किताबों में मेरी भी एक किताब थी। मुख्यअतिथि के रूप में वर्तमान में जनसम्पर्क, संस्कृति और उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा मौजूद थे। आमतौर पर जैसा होता है वही हुआ। इस मंच से भी पत्रकारिता के अवमूल्यन की बातें हो रही थी। कार्यक्रम में मौजूद अतिथिगण पत्रकारिता के अवमूल्यन को लेकर चिंता जाहिर करने के साथ ही पत्रकारों को सदाशयता की सीख देना नहीं भूले।
इन अतिथियों के बीच मुख्यअतिथि के रूप में जब लक्ष्मीकांतजी बोलने को उठे तो एकबारगी लगा कि वे भी कुछ ऐसा ही बोलेंगे। आरंभ में मेरी कोई रूचि उनको सुनने में नहीं थी किन्तु जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो उनका संबोधन चैंकाने वाला था। उन्होंने इस बात को खारिज नहीं किया कि पत्रकारिता का अवमूल्यन हुआ है किन्तु वे इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं दिखे। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि किस तरह देहात के पत्रकार अलग अलग किस्म की समस्याओं से जूझते हुए दायित्व की पूर्ति करते हैं। स्थानीय होने के नाते इन पत्रकारों को कभी …