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संघर्ष की प्रतिमूर्ति बाबा साहेब आम्बेडकर

-अनामिका डॉ. भीमराव आम्बेडकर की प्रतिष्ठा भारतीय समाज में देश के कानून निर्माता के रूप में है. भारत रत्न से अलंकृत डॉ. भीमराव अम्बेडकर का अथक योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता. वे हम सब के लिये प्रेरणास्रोत के रूप में युगों-युग तक उपस्थित रहेंगे. उनके विचार, उनकी जीवनशैली और उनके काम करने का तरीका हमेशा हमें उत्साहित करता रहेगा. बाबा साहेब धनी नहीं थे और न ही किसी उच्चकुलीन वर्ग में जन्म लिया था. वे अपने जन्म के साथ ही चुनौतियों को साथ लेकर इस दुनिया में आये थे लेकिन इस कुछ कर गुरजने की जीजिविषा ने उन्हें दुनिया में वह मुकाम दिया कि भारत वर्ष का उनका आजन्म ऋणी हो गया.  बाबा साहेब आज भले ही हमारे बीच में उपस्थित नहीं हैं लेकिन उन्होंने एक सफल जीवन जीने का जो मंत्र दिया, एक रास्ता बनाया, उस पर चलकर हम एक नये भारत के लिये रास्ता बना सकते हैं. यह रास्ता ऐसा होगा जहां न तो कोई जात-पात होगा और न ही अमीरी-गरीबी की खाई होगी. समतामूलक समाज का जो स्वप्र बाबा साहेब ने देखा था और उस स्वप्र को पूरा करने के लिये उन्होंने जिस भारतीय संविधान की रचना की थी, वह रास्ता हमें अपनी मंजिल की तरफ ले जायेगा.  14 अ…