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यूं छू लिया आसमां

-अनामिका कहते हैं कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती और ऐसी कोशिश करने वाले और आसमां छू लेने वालों से मुलाकात करनी है तो आपको छत्तीसगढ़ राज्य के उन गांवों में जाना होगा जिन गांवों के बारे में आज भी लोगों को ठीक से मालूम नहीं होता यदि उनके गांव की बिटिया अपने हौसलों के बूते खुद के साथ गांव का नाम रोशन नहीं किया होता। छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों और उनके सहयोग से स्वयं सहायता समूह की सफलताओं की अनेक कथाएं हैं लेकिन अब इससे आगे निकल कर उन लड़कियों ने मिसाल बनायी है जिस पर चलने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी लेकिन ऐसा हुआ है। शारीरिक रूप से अक्षम मानी जाने वाली लड़कियों के लिए बैशाखी उनका सहारा नहीं रही तो लगन ने ऐसे बेटियों को देश के नक्शे पर उभरने का अवसर दिया है। महिला सहभागिता और उनके आर्थिक समृद्धि-सशक्तिकरण के लिए किये जा रहे प्रयासों की अनकथ कथाएं और महिलाओं के लिए पे्ररणा का कार्य करती हैं। राजधानी रायपुर से महज 25-30 किलोमीटर की दूरी पर बसा है धरसींवा विकासखंड और इसी विकास खंड का एक छोटा सा गांव है गिरौद। गिरौद दूसरे गांव की तरह कभी था लेकिन आज उसकी पहचान तारामती की सफलता के कारण…