रविवार, 17 मई 2015

दोस्तों,
शोध पत्रिका "समागम" का मई 2015 का अंक सौपते हुए प्रसन्नता हो रही है. दुख इस बात का है कि हर बार एक नया वेतन आयोग आता है और हम सबको उम्मीद होती है कि अब की बार, वेतन भरमार होगी लेकिन ऐसा नहीं होता है. एक कोशिश है हमारी पीड़ा को आवाज़ देने की. अंक आपको कैसा लगा, ज़रूर बताएंगे।
संपादक

कुछ बात तो है उनमें, कोई यूँ ही मोदी नहीं हो जाता

  प्रो. मनोज कुमार कुछ बात तो है उनमें, कोइ यूँ ही नरेन्द्र मोदी नहीं कहलाता. वैसे भी भारतीय राजनीति में अलग-अलग समय में अलग-अलग मानक गढ़े...