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September 21, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सोच

ये पत्रकारिता है?मनोज कुमारमीडिया को लेकर इन दिनांे ब्लाॅग्स की दुनिया बेहद सक्रिय है। देश के हर कोने में बैठे हुए पत्रकार साथी को एक-दूसरे की खबर मिल ही जाती है किन्तु दुर्भाग्य से लगातार जो खबरें मिल रही हैं, वह चैंकती नहीं बल्कि शर्मसार करती हैं। अलग अलग जगहों से खबरें मिल रही हैं कि फलां पत्रकार फलां मामले में पकड़ा गया। खबरें आने के बाद भी इस तरह की करतूतें नहीं रूक रही हैं। इसे शर्मनाक कहा जाने में कोई अफसोस नहीं होना चाहिए। पत्रकार होने का अर्थ मुफलिस होना होता है जो अपना सबकुछ दांव पर लगाकर जनहित में काम करें लेकिन अनुभव यह हो रहा है कि अपना सब कुछ बनाकर स्वहित में पत्रकारिता की जा रही है। यहां सवाल यह नहीं है कि जो लोग बेनकाब हुए, वे वास्तव में थे या नहीं लेकिन पकड़े गये हैं तो बात जरूर कुछ है। इस बारे में मेरा सबसे पहले आग्रह होगा कि ऐसे लोगों के साथ पत्रकार पदनाम का उपयोग ही न किया जाए बल्कि लिखा जाए कि आरोपी फलां ने पत्रकारिता के नाम पर। जो लोग खबरों को बेच रहे हों या खबरों के माध्यम से धोखा दे रहे हों, वह भला पत्रकार कैसे हो सकते हैं? मेरा खयाल है कि आप भी सहमत होंगे। कई बा…

किताब

छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता की पत्रकारिताः कल, आज और कलआदरणीय दोस्तों,छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास रहा है तो वर्तमान भी उतना ही चमकदार है। राज्य का दर्जा पाने के पहले छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में जो ओज था आज भी वह कायम है। यह एक छोटे से राज्य के लिये गौरव की बात है। मैं भी इसी छोटे राज्य का हूं और मेरी पत्रकारिता भी यहीं से आरंभ हुई।छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता की पत्रकारिता ः कल, आज और कल शीर्षक से लगभग अंतिम चरण में हैं। मैं बहुत जल्द ही इसके कुछ अंश आपके पढ़ने के लिये ब्लाग पर पोस्ट करूंगा। इस विश्वास के साथ कि आप पढ़ कर बेबाकी से अपनी प्रतिक्रिया देंगे। बस, थोड़ा सा इंतजार।मनोज कुमार मो. 09300469918