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पानी के लिए हथियार नहीं, हाथ बढ़ाइए

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मनोज कुमार
जल है तो कल है, जीवन का हर पल है- यह बात उतनी ही अगम्य और अचूक है जितनी कि ईश्वर के प्रति हमारी आस्था, धार्मिकता और अटल विश्वास। प्रकृति प्रदत्त वरदानों में हवा के बाद जल की महत्ता सिद्ध है। जल पर हम जन्म से लेकर मृत्यु तक आश्रित हैं। वैदिक शास्त्रों के अनुसार जल हमें मोक्ष भी प्रदान करता है। पानी का एक गुण और है। यह राह बनाना जानता है। पत्थरों में रुकता से नहीं, अवरोधों से सिमटता नहीं। दबकर, पलटकर, कुछ देर ठहरकर यह अपनी राह खोज लेता है। और यही पगडंडी धीरे-धीरे दरिया का रास्ता बनती है। देख लीजिए जिन्होंने अपनी पगडंडी चुनी, जो पानी की तरह तरल, सहज और विलायक हुए वही समाज के पथप्रदर्शक भी बने। उन्हें ही सुकून भी मिला। दो दशक से ज्यादा समय से यह बात वजनदारी के साथ कही जा रही है कि अगला विश्व युद्ध पानी के मुद्दे पर लड़ा जाएगा। जल के लिये एक और युद्ध होगा जैसे सकरात्मक और नकरात्मक नारों और बातों से उठकर काम करना होगा। पानी के संकट में हथियार नहीं, सहयोग का हाथ बढ़ाइए. जलसंकट से उबरने की जुगत बिठाइए, पानी के खर्च को रोकिए और अपनी नयी पीढ़ी को जागरूक और शिक्षित करिए।  ‘रहिमन पानी रा…