दसवां विश्व हिन्दी सम्मेलन भोपाल में सम्पन्न, अगली मुलाकात मॉरीशस में


हिन्दी और भारतीय भाषाओं को तकनीकी के लिए परिवर्तित करना होगा- मोदी
-मनोज कुमार
34 वर्षों की लम्बी प्रतीक्षा के बाद भारत को विश्व हिन्दी सम्मेलन की मेजबानी का अवसर मिला और यह अवसर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के हिस्से में आया। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन के अवसर पर कहा भी किसम्मेलन को मध्यप्रदेश और भोपाल में आयोजित करने का कारण बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश हिन्दी के लिये समर्पित राज्य है और भोपाल सफल आयोजन करने के लिये विख्यात है। श्रीमती स्वराज ने विश्व हिन्दी सम्मेलन के आयोजनों की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 32 वर्षों बाद यह भारत में आयोजित हो रहा है। पहला सम्मेलन 1975 में नागपुर में हुआ था। तब से भोपाल के दसवें सम्मेलन तक आयोजन का स्वरूप बदला है। पहले के सम्मेलन साहित्य केन्द्रित थे लेकिन दसवाँ सम्मेलन भाषा की उन्नति पर केन्द्रित है। उन्होंने कहा कि भाषा की उन्नति के लिये संवर्धन ही नहीं संरक्षण की भी जरूरत पड़ रही है। 
दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि- भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है। भाषा हर किसी को जोडऩे वाली होना चाहिए। हर भारतीय भाषा अमूल्य है। भाषा की ताकत का अंदाजा उसके लुप्त होने के बाद होता है। हिन्दी भाषा का आंदोलन देश में ऐसे महापुरूषों ने चलाया जिनकी मातृभाषा हिन्दी नहीं थी, यह प्रेरणा देता है। भाषा और लिपि की ताकत अलग-अलग होती है। देश की सारी भाषाएँ नागरी लिपि में लिखने का आंदोलन यदि प्रभावी हुआ होता तो लिपि राष्ट्रीय एकता की ताकत के रूप में उभर कर आती हैं। यह बात आज दुनिया के अलग-अलग देशों में हिन्दी का महत्व बढ़ रहा है। भारतीय फिल्मों ने भी दुनिया में हिन्दी को पहुँचाने का कार्य किया है। डिजिटल दुनिया ने हमारे जीवन में गहरे तक प्रवेश कर लिया है। हमें हिन्दी और भारतीय भाषाओं को तकनीकी के लिए परिवर्तित करना होगा। बदले हुए तकनीकी परिदृश्य में भाषा का बड़ा बाजार बनने वाला है। उन्होंने विश्वास जताया कि विश्व हिन्दी सम्मेलन के माध्यम से हिन्दी को समृद्ध बनाने की पहल होगी और निश्चित परिणाम निकलेंगे।
बारह विषय के विमर्श प्रतिवेदन हुए प्रस्तुत : तीन दिवसीय दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में 12 विषय पर समानांतर सत्रों में विमर्श किया गया। इनमें आयी अनुशंसाओं को सत्रों के संयोजकों ने समापन अवसर पर प्रस्तुत किया। जिन विषय पर विद्वानों और हिन्दी-प्रेमियों ने विमर्श किया वो इस प्रकार है- गिरमिटिया देशों में हिन्दी, विदेशों में हिन्दी शिक्षण- समस्याएँ और समाधान, विदेशियों के लिए भारत में हिन्दी अध्ययन की सुविधा, अन्य भाषा राज्यों में हिन्दी, विदेश नीति में हिन्दी, प्रशासन में हिन्दी, विज्ञान क्षेत्र में हिन्दी, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी में हिन्दी, विधि एवं न्याय क्षेत्र में हिन्दी और भारतीय भाषाएँ, बाल साहित्य में हिन्दी, हिन्दी पत्रकारिता और संचार माध्यमों में भाषा की शुद्धता, देश और विदेश में प्रकाशन : समस्याएँ एवं समाधान, शामिल हैं।
10वें विश्व हिन्दी सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि हिन्दी भारत की राजभाषा के साथ संपर्क भाषा भी है। भारत की संस्कृति और जीवन मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली भाषा हिन्दी है।  गृह मंत्री श्री सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ की अधिकृत भाषा में हिन्दी शामिल होना चाहिये। जब अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिये दुनिया के 177 देश का समर्थन प्राप्त किया जा सकता है तो हिन्दी के लिये क्यों नहीं? हिन्दी दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा में से एक है। टेक्नालॉजी कंपनियों ने हिन्दी के महत्व को समझा है और वे इसे बढ़ावा दे रही हैं। इंटरनेट पर जिस भाषा में सबसे अधिक कंटेंट जनरेट होता है वह भाषा हिन्दी है। भारत में बोली जाने वाली सबसे पुरानी भाषा तमिल है और राष्ट्रीय स्तर पर मातृ भाषा संस्कृत है। 
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सम्मेलन से हिन्दी के प्रति सकारात्मक वातावरण बना है। श्री चौहान ने कहा कि हिन्दी को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार समाज के साथ मिलकर हरसंभव प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी बोलने वाले को श्रेष्ठ समझने की मानसिकता को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश की संस्कृति और हिन्दी भाषा का गौरवपूर्ण इतिहास है। हिन्दी बोलने से सम्मान कम नहीं होता बल्कि और बढ़ता है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन की अनुशंसाओं पर भारत सरकार आवश्यक कार्रवाई करेगी। मध्यप्रदेश सरकार अपने स्तर पर हिन्दी को प्रोत्साहित करने के ठोस कदम उठाएगी। उन्होंने हिन्दी को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए घोषणा की कि प्रदेश में राजभाषा विभाग को पुनर्जीवित किया जाएगा। प्रदेश में उपभोक्ता वस्तुओं का नाम हिन्दी में लिखा जाएगा। कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर हिन्दी में बनाए जाएँगे और शासकीय विज्ञापन हिन्दी में जारी किए जाएँगे। उन्होंने घोषणा की कि अटल बिहारी हिन्दी विश्वविद्यालय को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का संस्थान बनाया जाएगा। हिन्दी का उपयोग करना मानव अधिकार माना जाएगा। उच्च न्यायालयों के निर्णय हिन्दी में उपलब्ध करवाने के लिए अनुवादक नियुक्त किए जाएँगे। हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं के शब्दों को परस्पर ग्रहण किया जाएगा। जहाँ पर अँग्रेजी लिखना जरूरी होगा वहाँ हिन्दी में प्रमुखता से लिखा जाएगा। मध्यप्रदेश के सभी संस्थानों के नाम हिन्दी में लिखे जाएँगे। किसी अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध हिन्दी में बोलने एवं काम करने पर निलंबन जैसी कार्रवाई नहीं की जाएगी। शासकीय पत्राचार हिन्दी में किया जाएगा। तकनीकी प्राक्कलन हिन्दी में बनाए जाएँगे। मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सभी विभागाध्यक्ष हिन्दी का प्रयोग करेंगे। प्रदेश में सभी प्रतियोगी परीक्षाएँ हिन्दी माध्यम में होगी। विधि अनुवादकों की नियुक्ति की जाएगी। हिन्दी अधिकारी नियुक्त किए जाएँगे। प्रदेश में हर वर्ष 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस आयोजित किया जाएगा। हिन्दी को प्रोत्साहित करने वाले व्यक्तियों को हिन्दी दिवस पर सम्मानित किया जाएगा। गैर हिन्दीभाषी अधिकारियों को हिन्दी का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रदेश में सभी सूचनाएँ और अधिसूचनाएँ हिन्दी में जारी की जाएँगी।
केन्द्रीय विदेश राज्य मंत्री जनरल डॉ. वी.के.सिंह ने प्रस्तावित किया कि विश्व हिन्दी सम्मेलन में प्राप्त अनुशंसाओं के लिये विदेश मंत्रालय स्तर पर एक विशेष समीक्षा समिति गठित की जाएगी यह अनुशंसाओं को विभिन्न मंत्रालयों को अग्रेषित करेगी। वर्ष 2018 में 11वाँ विश्व हिन्दी सम्मेलन मॉरिशस में होगा। उनके इन दोनों प्रस्ताव को सम्मेलन में अनुमोदित किया गया। सांसद एवं आयोजन समिति के उपाध्यक्ष अनिल माधव दवे ने प्रख्यात अभिनेता अमिताभ बच्चन की अनुपस्थिति में उनके द्वारा प्रेषित पत्र पढ़ा। पत्र में बच्चन ने लिखा था कि  अपनी भाषा के सम्मान से ही कोई समाज बड़ा होता है।
विश्व हिन्दी सम्मान से विभूषित हुए देशी-विदेशी हिन्दीसेवी : समारोह में श्री अनूप भार्गव अमेरिका, कु. स्नेह ठाकुर कनाडा, डॉ. आई.एन.एस. जर्मनी, डॉ. अकीरा साकाखासी जापान, प्रो. ऊषा देवी शुक्ल दक्षिण अफ्रीका, सुश्री कमला रामलखन त्रिकास्त तुबेको, डॉ. देवंतदास लिथुवानिया, डॉ. नीलम कुमारी फिजी, डॉ. सारजिक अजामिन माताबदल मॉरिशस, गुलशन सुखलाल मॉरिशस, डॉ. इंदिरा गाजियाबादी रूस, इंदिरा कुमार दासनायक श्रीलंका, मोहम्मद इस्माइल सउदी अरब, श्री सुरजन परोही सूरीनाम, श्री कैलाश नाथ यू.के. एवं श्रीमती ऊषा राजे सक्सेना, यू.के. तथा भारत के डॉ. प्रभाकर श्रोत्रिय, डॉ. प्रभात कुमार भट्टाचार्य, डॉ. एन.चन्द्रशेखरन नायर, डॉ. मधु धवन, सुश्री माधुरी जगदीश छेरा, प्रो. अनंत राम त्रिपाठी, कुमारी अहम कामे, वरमानंदन कामछा, डॉ. नागेश्वरम सुंदरम, प्रो. हरिराम मीणा, डा. व्यासमणि त्रिपाठी, डॉ. सुरेश कुमार गौतम, आदित्य चौधरी, डॉ.के.के अग्रवाल, अन्नू कपूर, अरविंद कुमार, माताप्रसाद एवं आनंद मिश्रा अभय को विश्व हिन्दी सम्मान से विभूषित किया गया।

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