कातिल सावन और मार्च



मनोज कुमार
सावन और मार्च का महीना दोनों ही कातिल होता है. सावन नायिका के तन और मन को जलाता है तो मार्च का महीना लोगों की जेब को जला डालता है. सावन जाते जाते नायिका निढाल हो जाती है तो मार्च गुजरते ही नायक भी लगभग ठंडा सा पड़ जाता है...  इस गर्माते मार्च के महीने में जब यह गीत याद आ जाये तो ऐसा लगता है कि किसी ने जले पर नमक छिडक़ दिया है. तेरी दो टकियों की नौकरी में मेरा लाखों का सावन जाये... यह गाना तो उन लोगों को जरूर याद होगा जो मेरी उम्र के होंगे... उनकी बात नहीं करता जिसमें नायिका मिस कॉल से पट जाने की बात कहती हो... खैर, यह बड़ा उलझाव वाला मामला है... अभी तो हम सावन की बात कर लें...अब आपके दिमाग में यह बात आयेगी कि ये आदमी बौरा गया है... अच्छा खासा बासंती मौसम है... होली आने को है... रंगों का गीत गुनगुनाने के बजाय सावन की बातें कर रहा है... आप लोग ठीक सोच रहे हैं... मेरा सावन तो कब का बीत गया... सही मायने में तो होली के लायक भी नहीं बचा... अब जो बचा है वह मार्च महीने का हिसाब किताब... इससे कोई नहीं बच पाया है... नायिका के लिये सावन लाखों का है तो नायक हों या न हो... हर आदमी के लिये मार्च का महीना लाखों का है... ओहदेदार पदों पर बैठने वाले लोग इस जुगत में लगे हैं कि बजट लेप्स न हो जाये... नौकरीपेशा इस बात से परेशान हैं कि इनकम टेक्स किस तरह बचाया जाये... जिन लोगों की छुट्टियां बच गयी हैं, वे अपनी छुट्टी बचाने की जुगत में लगे हैं... 
अलग अलग तरह से देखो तो मार्च का महीना लाखों का ही नहीं, करोड़ों का है...जब बारिश में भीगी-भीगी सी मस्त नायिका सावन को लाखों का बता रही होगी तब भी मार्च करोड़ों का ही होगा... पता नहीं तब क्यों किसी फिल्मकार को यह क्यों नहीं सूझा कि वह मार्च महीने को करोड़ों का बता कर किसी नायक को नचवा दे... चलो, कोई हीरो नहीं नाचा तो न सही... कुछ कल्पना करते हैं कि यह सावन अगस्त के महीने में आने के बजाय मार्च में आता... तब क्या होता...? यह कल्पना उसी साठ और सत्तर दशक की है... दो हजार दस के बाद की कल्पना करेंगे तो मजा किरकिरा हो जाएगा क्योंकि अब कि नायिकाओं को लाखों के सावन से मतलब नहीं, वह तो एक मिस कॉल से पटने को तैयार है... इसलिये हमें फ्लैशबैक में ही जाना होगा... नायिका गरजते-बरसते मौसम में इठलाती हुई नायक से मनुहार करती हुई गा रही है... तेरी दो टकियो की नौकरी में मेरा लाखों का सावन जाये... इत्ते में परेशान नायक शायद ऐसा ही गायेगा... भाड़ में गया तेरा सावन और तु...इधर लाखों का भ_ा बैठा जाये... चलो, हंसी ठ्ठा खूब हुआ. होली आने में अभी एक पखवाड़ा है.. मैं तो इस लिखे के साथ एडवांस में ही होली बोल देता हूं.. हेप्पी होली इसलिये नहीं कि अभी तो इतना दुखड़ा रोया हूं.. इसके बाद तो आप हेप्पी होंगे और मैं.. हालांकि आप बोलो ना बोलो लेकिन आप भी...

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