इनकी चुनौती नहीं, हौसला देखिये


-अनामिका
शिक्षा किसी भी हिंसा का सबसे माकूल जवाब हो सकता है और छत्तीसगढ़ राज्य ने इस बात को कई बार साबित कर दिखा चुका है। लगातार नक्सली हमले से सहमने और दहलने के बजाय दुगुनी ताकत से हिंसा का जवाब शिक्षा से देने के लिये छत्तीसगढ़ अपने-आप को प्रस्तुत करता रहा है। हाल ही में छत्तीसगढ़  के नौनिहालों ने शिक्षा के क्षेत्र में जो  ऊंचाईयां अर्जित  की है, वह छत्तीसगढ़ के साहस को दिखाता है। राज्य सरकार ने विद्यार्थियों को अवसर दिया और विद्यार्थियों ने जता दिया कि अवसर मिलते ही आसमां छू लेंगे। यही नही, हर बार और बार बार उनकी मांग होगी कि आसमां को थोड़ा और ऊंचा कर लो ताकि चुनौती का सामना करने का साहस उनमें दिख सके। सरकार ने नक्सल पीडि़त क्षेत्रों में स्कूली विद्यार्थियों के लिये योजना शुरू की छू लो आसमां और विद्यार्थियों ने आसमां छू कर ही नहीं, बल्कि उंचा उठा  कर दिखा दिया।

आमतौर पर विशम स्थितियों का अर्थ होता है निराशा में डूब छठाना और ऐसे में पीईटी, एआई पीएमटी, एआईट्रिपलई और पीपीएचटी छठैसी परीक्षाओं में उत्तीर्ण हो ना कोई मामूली बात नहीं है। चुनौतियां, डर और दब्बूपन इन सफल विद्यार्थियों के सामने बौने से हो जाते हैं। स्कूली शिक्षा में तो इनका कोई सानी है ही नहीं, प्रोफेशनल्स कोर्स में जो  सफलता के झंडे गाड़े हैं, वह सुविधाभोगी विद्यार्थियों के लिये सीख है कि सुविधा सफलता को कोई साधन नहीं। पीईटी, एआई पीएमटी, एआईट्रिपलई और पीपीएचटी छठैसी परीक्षाओं में उत्तीर्ण हो चुके हर बच्चे अपने आपमें एक मिसाल हैं। हर किसी की एक कहानी है दुख की, तनाव और डर की लेकिन इसी चुनौतियों ने उनके भीतर साहस भरा है दुनिया को जीत लेने का। एक मौका मिला और नक्सल पीडि़त बस्तर अंचल के बच्चों ने दिखा दिया अपना कमाल। 

प्रतिभा को तो बस अवसर की तलाश रहती है। जिस क्षेत्र के एक-दो बच्चे ही बमुश्किल पीईटी, एआई पीएमटी, एआईट्रिपलई और पीपीएचटी छठैसी परीक्षाओं में उत्तीर्ण हो पाते थे, आज वहां के 38 बच्चों ने एक वर्श में ही इन परीक्षाओं में सफल होकर अपने परिवार के साथ छत्तीसगढ़ का नाम रौशन कर दिया है। इसी तरह की सफलता हासिल करने वाले विद्यार्थियों की सूची पिछले शैक्षिक सत्र में भी दर्ज  थी। इस वर्श दंतेवाड़ा जिले के कारली में बालिकाओं तथा पातररास में बालकों के लिए स्थापित शैक्षिक संस्था ‘छू लो आसमान’ से मिली है। इस संस्था में अच्छी पढ़ाई के साथ बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार प्रतियागी परीक्षाओं के लिए भी तैयार किया जा  रहा है।

छू लो आसमान में रहकर 78 प्रतिशत नम्बरों से 12वीं कक्षा पास करने वाली दंतेवाड़ा के कुड़पारास की अनुसूचित छठनछठाति की प्रियंका नागेश ने पीपीटी की परीक्षा में राज्य में सातवां और महिला वर्ग में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस मेधावी बालिका को यहां रायपुर स्थित शासकीय इंजीनियरिंग कालेज में सिविल ब्रांच में प्रवेश भी मिल गया है। प्रियंका ने दोहरी सफलता दर्ज  की है। उसका चयन एआईट्रिपलई में भी हुआ है। प्रियंका ने कहा कि उसने कभी सोचा भी नहीं था कि उसे पढ़ाई के क्षेत्र में इस तरह दोहरी-तीहरी खुशियां मिलेगी। इसी संस्था में तैयारी कर एआईपीएमटी पास करने वाली भावना ठाकुर ने बताया कि वह कार्डियोलाजिस्ट (हृदय रोग विशेशज्ञ ) बनना चाहती है। ह्दय की बीमारियों का इलाज बहुत मंहगा होता है। इसलिए वह कार्डियोलाजिस्ट बनकर गरीब मरीछठों का नि:शुल्क इलाज करना चाहती है। भावना दंतेवाड़ा छिठले के ग्राम हाउरनार की रहने वाली है और उसने 80 प्रतिशत नम्बरों से 12 वीं की परीक्षा  पास की है। 

सुकमा छिठले के ग्राम धोबनपाल की रहने वाली श्यामा मरकाम ने कहा कि पीएमटी में पास होना और मुख्यमंत्री से मिलना उसे दोहरी खुशी दे रहा है। उसकी मां श्रीमती आयते खेती-किसानी कर घर चलाती हैं। श्यामा ने बताया कि कक्षा 11वीं और 12 वीं की पढ़ाई उसने छू लो आसमान में पूरी की है। श्यामा ने कहा कि अब वह डॉक्टर बनकर अपनी मां का सहारा बनेगी और अपने क्षेत्र में ही रहकर लोगों की सेवा करेगी। 90.8 प्रतिशत नम्बरों से 12 वीं की परीक्षा पास करने के साथ ही पीईटी, एआईट्रिपलई और पीपीटी में भी सफलता हासिल करने वाला गोपाल मजदूर पिता पदम बहादुर का प्रतिभावान बेटा है।  बचेली (दंतेवाड़ा) के गोपाल बहादुर ने ‘छू लो आसमान’ को चरितार्थ कर दिया है।  गोपाल को भी शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज रायपुर में सिविल ब्रांच में प्रवेश मिल गया है। गोपाल की फीस का इंतजाम भी सरकार ने कर दिया है। गोपाल के इंजीनियर बनने का सपना साकार होने जा रहा है। गोपाल का कहना है कि मौका और सुविधा मिली तो वह आईएएस की तैयारी करेगा।

इसी तरह अतुल कुमार ने भी पीपीटी,पीएमटी,पेट और पीपीएचटी एवं छात्र मांगू को भी पीईटी और पीपीटी में सफलता मिली है। वह इंजीनियर बनने के साथ ही वैज्ञानिक बनना चाहता है ताकि अपने क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार वह नई-नई खोज कर सके। मांगू सुकमा जिले के ग्राम कोकालपाल का रहने वाला है। सुकमा जिले के ही सुदूर ग्राम किस्टाराम की कुमारी रूकमणी के पिता की हत्या नक्सलियों ने 2005 में कर दी थी, तब रूकमणी महज आठ वर्श की थी और वह गांव के ही स्कूल में चौंथी कक्षा में पढ़ रही थी। बचपन में ही पिता का साया छिन जाने के कारण रूकमणी को आगे की पढ़ाई मुश्किल हो गई। रूकमणी की बड़ी बहन की तो पढ़ाई छूट ही गई, लेकिन विपरीत हालातों में रूकमणी में पढ़ाई जारी रखा। दसवीं में अच्छे अंक आने पर उसका एडमिशन दंतेवाड़ा के ’छू लो आसमान’ संस्था में हो गया। वहां मिली बेहतर शिक्षा और भयमुक्त वातावरण से रूकमणी का चयन इस वर्श ए आईट्रिपल-ई में हुआ है। रूकमणी ने बताया कि ’छू आसमान’ में प्रवेश से पहले आईआईटी और एनआईटी के बारे मे नहीं जानती थी। दसवीं में मेरे गणित में अच्छे अंक आने के कारण शिक्षकों ने मुझे गणित विशय लेने के लिए कहा। वहां उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ आईआईटी की कोचिंग भी दी, पहली ही बार में वह एआईट्रिपल-ई की परीक्षा में सफल हो गई।

राज्य सरकार की छू लो आसमां की सफलता की कहानी को आगे बढ़ाते ये बच्चे पीईटी, एआई पीएमटी, एआईट्रिपलई और पीपीएचटी छठैसी परीक्षाओं के बारे में बहुत कुछ नहीं छठानते थे। किसी का सपना डाक्टर बन छठाने का था तो किसी को इंछठीनियर बनना था। कोई प्रशासनिक क्षेत्र में जाना चाहता था तो कोई पढ़ाई के सपने पूरे कर लेना चाहता था। यह सच है कि इन विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा के बूते आसमां छू लिया है लेकिन सफल हो जाने के बाद भी इनके रास्ते कठिन थे। आगे की पढ़ाई की मोटी फीस इनका रास्ता रोक रही थी लेकिन राज्य शासन प्रतिभाओं को निखारने का जो  संकल्प लिया था, वह इनकी हौसलाअफजाई कर रहा था। कुछ बच्चों की फीस सरकार ने जमा कर दी है तो इनका हौसला बुलंद रहे इसके लिये प्रोत्साहन के रूप में टेबलेट के साथ अनेक तोहफे मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह ने भेट किया है। हौसलों की परख के लिये सरकार का यह रास्ता चुनौतियों के कांटों को सफलता के फूल में बदल रहा है।

टिप्पणियाँ

  1. " यथा नाम तथा गुण " को चरितार्थ करते हुए " छू लो आसमान " ने अनेक उपलब्धियॉं हासिल की हैं हम छत्तीसगढियों के लिए यह गर्व की बात है । मुझे दन्तेवाडा की प्रियँका नागेश और भावना ठाकुर तथा सुकमा की श्यामा मरकाम पर गर्व है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में इतनी ऊँची उडान भरी कि इन बच्चियों ने हमारे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया । साथ में बालकों को भी कोटिशः आशीष । मनोज भाई ने यह सुन्दर समाचार दिया , उन्हे बधाई ।

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