आप हम जिन्हें गिरमिटिया कहते हैं, वे सब हमारे भारतीय हैं. आज भारतीय गिरमिटियों का व्यापक संसार है. साहित्य, संस्कृति एवं कला की उनकी दुनिया को उन्होंने उस बुरे दौर में भी जिंदा रखकर भारत की सनातनी परंपरा को आगे बढ़ाया है. समय बदला और चीजें भी बदली लेकिन गिरमिटिया शब्द एक तरह से उनके साथ चिपक गया है. कोई सौ वर्ष पहले गुलामी की प्रतीक जो कांट्रेक्ट हुआ करता था, उसे कानूनन समाप्त कर दिया गया है. गिरमिटिया के इस संसार पर केन्द्रित अंतरराष्ट्रीय मानक की अनुसंधान पत्रिका का अक्टूबर 2026 का यह महत्वपूर्ण अंक है. माना जाता है कि पहले गिरमिटया महात्मा गांधी थे, सो उनके जन्मदिवस पर यह अंक गिरमिटिया गांधी को समर्पित कर रहे हैं. इस अंक को समृद्ध बनाने के लिए आपके विचार, लेख और शोध आलेख आमंत्रित हैं. 25 सितंबर, 2026 तक हमें भेजिए.
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गिरमिटया महात्मा गांधी
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