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अप्रैल 23, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

‘सु’ अपने साथ ले गए और ‘नील’ हम हो गए

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मनोज कुमार रात हो रही थी और लगभग थक सा गया था लेकिन मन बार बार सोशल मीडिया पर अटका हुआ था. एक बार फिर हिम्मत कर फेसबुक ओपन किया तो पहली खबर सुनील के नहीं रहने की मिली. दयाशंकर मिश्र ने यह सूचना पोस्ट की थी. सहसा यकिन नहीं हुआ लेकिन दयाशंकर के पोस्ट पर अविश्वास करने का भी कोई कारण नहीं था. वे एक जिम्मेदार लेखक-पत्रकार हैं अत: मन मारकर खबर पर यकीन करना पड़ा. इसके बाद तो कई लोगों ने यह सूचना शेयर किया. इस खबर को पढक़र कर सुनील पर गुस्सा आया. कुछ पलों में उसने पराया कर दिया. हम लोगों के बीच में कोई व्यवसायिक रिश्ता नहीं था. लेकिन जो था, वह हम दोनों ही जानते थे. पांचेक साल पहले जब मेरे दिल की चीर-फाड़ की नौबत आयी थी तो सबसे पहले चिंता करने वालों में सुनील था. इसके बाद पिछले लॉकडाउन से लेकर अब तक अपनी बीमारी से दो-चार हो रहा हूं. इस बीच एक बार सुनील से मुलाकात हुई. वही चाय पीकर जाना लेकिन कश्मीर से कन्याकुमारी तक जो चाय का हाल है, सो चाय समय पर नहीं आयी. अगली बार साथ चाय पियेंगे के वायदे के साथ मैं चला आया. शारीरिक रूप से अपेक्षाकृत कमजोर होने के बाद बहुत देर तक बैठा नहीं जा रहा था. हां, इस ब