शनिवार, 30 अप्रैल 2011

aam admi ka neta


एक मई जन्मदिवस पर खास
न रूकने वाले और न कभी थकने वाले बिरजू भइया
-मनोज कुमार
छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय नेताओं की गिनती की जाएगी तो बृजमोहन अग्रवाल का नाम सबसे आगे होगा। उनकी लोकप्रियता जन की लोकप्रियता है। वे छत्तीसगढ़ के अपनी तरह के अकेले राजनेता हैं जिनके दरवाजे आम आदमी के लिये हमेषा से खुले रहे हैं। वे मंत्री हों या विधायक, उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है और उन्हें इस बात से भी फर्क नहीं पड़ता है कि उनसे मिलने वाला उनके  अपने दल का है या विरोधियों का। वे हर किसी से, हर समय दिल से मिलते हैं। मदद के लिये भी उनके दरवाजे खुले होते हैं। बृजमोहन की यह खासियत उनके कॉलेज के दिनों से रही है जब वे कॉलेज की राजनीति करते थे। सत्ता के मखमली रास्तों पर भी चले और कांटे भी चुभे किन्तु जनता ने हमेषा उन्हें हाथों हाथ लिया। वे अविभाजित मध्यप्रदेष में भी मंत्री बने तो स्वतंत्र राज्य छत्तीसगढ़ के सबसे प्रभावषाली मंत्रियों में एक हैं। उनका यह प्रभाव राजनीति नहीं बल्कि आम आदमी की ताकत का प्रभाव है। षायद यही कारण है  िकवे मुख्यमंत्री न होते हुए भी किसी मुख्यमंत्री से कम की ताकत नहीं रखते हैं।
विन्रमता और अनुषासन उन्होंने विरासत में पायी है। भारतीय जनता युवा मोर्चा से अपनी राजनैतिक पारी षुरू करने वाले बृजमोहन की गिनती उन लोगों में की जा सकती है जिन्होंने भाजपा को मध्यप्रदेष एवं छत्तीसगढ़ में पहचान दी। मध्यप्रदेष के वर्तमान मुख्यमंत्री षिवराजसिंह चौहान एवं पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती उनके साथी रहे हैं। आज भी षिवराजसिंह से उनका वही आत्मीय संबंध है जो आरंभिक दिनों में था। उनके इन्हीं प्रयासों का परिणाम कहा जाना चाहिए कि जब मध्यप्रदेष का विभाजन हुआ और छत्तीसगढ़ पृथक राज्य के रूप् में अस्तित्व में आया तो उन्हें छत्तीसगढ़ के नेता के रूप् मंे देखा जाने लगा। छत्तीसगढ़ नब्बे विधानसभा सीटों के साथ बना था। अंकगणित के आधार पर सत्ता कांग्रेस को मिली थी और भाजपा को विपक्ष में बैठना था लिहाजा यह माना गया कि कांग्रेस की नींद हराम करने में बृजमोहन ही सफल होंगे। भाजपा की अंदरूनी राजनीति को यह गंवारा नहीं हुआ। बृजमोहन को नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाये जाने से समर्थकों में आग लग गयी। सबने सीमा तोड़कर प्रदर्षन किया और बात हिंसा तक जा पहुंची। एकात्म परिसर तब आगजनी का षिकार हुआ।
इसका खामियाजा बृजमोहन को ही भुगतना पड़ा और उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। बृजमोहन पार्टी की इस कार्यवाही से निराष तो हुए किन्तु दुखी नहीं हुए। वे पार्टी लाईन का सम्मान करना जानते थे सो संयम रखकर पार्टी हाईकमान तक बात पहुंचायी और अविलम्बन उनका निष्कासन रद्द कर दिया गया किन्तु बृजमोहन किनारे कर दिये गये। तीन साल बाद राज्य में सत्ता की बागडोर कांग्रेस से फिसल कर भाजपा के हाथों में आयी और एक बार फिर हसरत बंधी कि अबकी सत्ता के षीर्ष में बृजमोहन होंगे किन्तु ऐसा नहीं हो सका। बृजमोहन को दूसरे नम्बर पर रखा गया। वे रूचिवान और संस्कारित हैं और उनकी रूचि कला संस्कृति में रही है सो संस्कृति, गृह और पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गयी। छोटी सी चीज को भी बड़ा बना देने की कला बृजमोहन में है सो उन्होंने संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय को महत्वपूर्ण बना दिया।
दषाब्दियों से छत्तीसगढ़ की धर्मस्थली राजिम में बहने वाली नदियों के संगम पर कुंभ की नींव डालने का श्रेय उन्हें ही जाता हैं। अपने प्रयासों को सफल करते हुए उन्होंने देषभर से साधुओं को आमंत्रित किया। दिग्गजों ने लगातार तीन साल तक यहां आकर कुंभ की बुनियादी जरूरतों को समझा और आखिरकार ऐलान कर दिया गया कि राजिम में प्रतिवर्ष कंुभ का आयोजन किया जाएगा। इस कुंभ को अर्धकुंभ का दर्जा दिया गया। पर्यटन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ में अद्वितीय काम हुआ। अनेक अनुछुये और गुमनाम ऐतिहासिक स्थलों को उकेरा गया। विष्व पर्यटन नक्षे पर उन्हें स्थापित किया गया और एक बड़ा राजस्व देने वाले विभाग के रूप में छत्तीसगढ़ का पर्यटन विभाग स्थापित हो गया। संस्कृति के क्षेत्र में भी उन्होंने कुछ ऐसा ही काम किया।
काम के धुनी बृजमोहन को हमेषा पीछे करने की कोषिषें की जाती रही हैं। एक बार फिर उन्हें हाषिये पर धकेलने की कोषिष हुई जब उनसे गृह मंत्रालय वापस लिया गया। राजनीतिक गलियारों में इसे बृजमोहन के पर काटने की संज्ञा दी गई किन्तु लोगों को यह पता नहीं था कि बृजमोहन सत्ता के लिये नहीं, जनता के लिये बने हैं। सत्ता के लिये न तो वे जनसम्मान खोना चाहेंगे और न ही पार्टी के सामने कोई धर्मसंकट खड़ा करेंगे। उनके इस स्वभाव ने उनका कद और बढ़ा दिया। मुख्यमंत्री से विवाद करने वाले एक अन्य प्रभावषाली मंत्री को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था और विनम्र बृजमोहन ने अपना स्थान और बड़ा कर लिया। राज्य में भाजपा सरकार लोकप्रिय है किन्तु संकटमोचक के रूप में बृजमोहन हमेषा उपस्थित रहे हैं। राज्य में होने वाले उपचुनावों की कमान भाजपा ने बृजमोहन को सौंपी और वे पार्टी के विष्वास पर हमेषा खरा उतरे। स्थानीय निकायों के चुनाव में भी बृजमोहन ने भाजपा को जीत दिलायी।
बिरजू भइया के नाम से मषहूर हर दिल अजीज बृजमोहन अग्रवाल देररात तक काम करते हैं और आम लोगों से मिलने का समय भी यही होता है। वे न थकते हैं और न ही रूकते हैं। उनकी लोकप्रियता का मिसाल इसी बात से जान लीजिये कि छत्तीसगढ़ के किसी भी स्थान पर वे मुख्यअतिथि हों और उनके पहुंचने में देर नहीं बल्कि महादेर भी हो जाए तो लोग उनके आये बिना कार्यक्रम आरंभ नहीं करते हैं। षाम सात बजे होने वाले प्रोग्राम में वे एक बार तो दो बजे रात को पहुंचे तो देखा लोग उनके इंतजार में खड़े हैं। बृजमोहन की यह देरी कार्यक्रम स्थल से काफी दूर रहने के कारण हुई। इस वाकये में सबसे खास बात यह है कि आयोजक और अतिथि दोनों ही तत्पर रहे। मुसीबतजदा लोगों के लिये तो बृजमोहन के ही दरवाजे खुले हैं। खुले हाथों से मदद करना कोई उनसे सीखे। उनकी इसी खासियत की वजह से वे मीडिया के दोस्त कहलाते हैं। मुझे तो लगता है कि उनका जन्म एक मई को इसलिये ही हुआ क्योंकि वे राजनेता न होकर जननेता हैं और जननेता के लिये श्रमजीवी होना जरूरी है। मजदूर दिवस को सार्थक करता है बृजमोहन अग्रवाल का जन्मदिन। आज के समय में ऐसे राजनेता का मिलना दुलर्भ बात है किन्तु हम भाग्यषाली हैं कि हमारे साथ बृजमोहन हैं।


खादी और गांधी पहले से ज्यादा प्रासंगिक हो रहे हैं-रघु ठाकुर

भोपाल। ‘खादी केवल वस्त्र नहीं बल्कि वह अनेक आयामों से जुड़ा हुआ है. जैसे जैसे समय गुजरता जा रहा है, वैसे वैसे खादी और गांधी अधिक प्रासंगिक...