शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2009

अपना राज्य

राज्यगीत एक अच्छी पहल
लगभग एक सप्ताह बाद मध्यप्रदेश अपनी एक और वर्षगांठ मनायेगा। मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार को एक तरफ जहां लगातार पांच बार राज्योत्सव मनाने का अवसर मिला है वहीं भाजपा सरकार इस राज्योत्सव को एक नयी पहचान देने जा रही है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान की पहल पर फैसला लिया है कि राज्यगीत बनाया जाएगा। संभवतः मध्यप्रदेश पहला राज्य होगा जहां इस तरह की पहल हो रही है। अभी तक किसी राज्य का कोई राज्यगीत जैसी परम्परा रही है। भाषाई विवाद से परे इस पहल का स्वागत किया जाना चाहिए। राज्यगीत बने, इसका सभी स्वागत करेंगे किन्तु अपेक्षा होगी कि यह गीत किसी विचारधारा अथवा पार्टी प्रेरित न होकर राज्य को प्रतिबिम्बित करने वाला हो तो सुखकर होगा। यहां स्मरण दिलाना होगा कि भोपाल के लेखक एवं प्रोफेसर पुरूषोत्तम चक्रवर्ती ने काफी पहले एक ऐसा गीत तैयार किया है जिसमें सम्पूर्ण मध्यप्रदेश की झलक देखने को मिलती है। इस गीत का प्रकाशन संभवतः राज्य शिक्षा केन्द्र ने अपने किसी प्रकाशन में किया है। राज्यगीत बनना ऐतिहासिक कदम है और इसे इसी सोच के साथ बनाया जाना चाहिए। अपेक्षा होगी कि मध्यप्रदेश और मध्यप्रदेश से बाहर रह रहे बुद्विजीवी भी इस दिशा में सरकार को अपनी सलाह भेजें ताकि राज्यगीत मुकम्मल चेहरा पा सके।

खादी और गांधी पहले से ज्यादा प्रासंगिक हो रहे हैं-रघु ठाकुर

भोपाल। ‘खादी केवल वस्त्र नहीं बल्कि वह अनेक आयामों से जुड़ा हुआ है. जैसे जैसे समय गुजरता जा रहा है, वैसे वैसे खादी और गांधी अधिक प्रासंगिक...