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जिंदगी की एक ही दवा ‘उम्मीद’

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मनोज कुमार डॉक्टर शिफा एम. मोहम्मद के लिए अपनी निकाह से ज्यादा जरूरी है कोरोना से जूझ रहे मरीजों की जिंदगी बचाना तो बैतूल के लक्ष्मी नारायण मंदिर में असंख्य लोग चुपके से अनाज रख जाते हैं. कहीं छोटे बच्चे अपने गुल्लक में रखे बचत के पैसे संकट से निपटने के लिए खुले दिल से दे रहे हैं तो कहीं लगातार ड्यूटी करने के बाद भी थकान को झाड़ कर कोरोना से बचाव के लिए सिलाई मशीन पर महिला आरक्षक सृष्टि श्रोतिया मास्क बना रही हैं. होशंगाबाद में अपने हाथ गंवा चुके उस जाबांज व्यक्ति की कहानी भी कुछ ऐसी है जो शारीरिक मुश्किल को ठेंगा दिखाते हुए रोज 200 सौ मास्क बनाकर मुफ्त में बांट रहे हैं. इंदौर की वह घटना तो आप भूल नहीं सकते हैं जिन डॉक्टरों पर पत्थर बरसाये गए थे, वही अगले दिन उन्हीं के इलाज करने पहुंच गए. ये थोड़ी सी बानगी है. हजारों मिसालें और भी हैं. दरअसल इसे ही जिंदगी की दवा कहते हैं. इसे आप और हम उम्मीद का नाम देते हैं यानि जिंदगी की दवा उम्मीद है.  उम्मीद जिंदगी की इतनी बड़ी दवा है कि उसके सामने दवा फेल हो जाती है. एक पुरानी कहावत है कि जब दवा काम ना करे तो दुआ कारगर होती है और आज हम जि