बुधवार, 12 जनवरी 2011

media

समागम अब मीडिया की शोध पत्रिका

मीडिया पर एकाग्र मासिक पत्रिका समागम का प्रकाशन अब शोध पत्रिका के

रूप में किया जाएगा। यह शोध पत्रिका द्विभाषी होगी।  मीडिया का विस्तार हो

रहा हैऔर मीडिया शोध का कैनवास भी बड़ा हुआ है किन्तु शोध पत्रिकाओं का

प्रकाशन अभी भी नगण्य है। इस कमी को पूरा करने की दृष्टि से एक विनम्र

प्रयास विगत दस वर्षाें से प्रकाशित हो रही मीडिया पर एकाग्र मासिक

पत्रिका समागम करने जा रहा है। पत्रिका का जनवरी २०११ का अंक महात्मा

गांधी की पत्रकारिता पर केन्द्रित है।

भोपाल से प्रकाशित मीडिया पर एकाग्र मासिक पत्रिका समागम का सफर जनवरी

२०११ में दस वर्ष पूरे कर फरवरी दो हजार ग्यारह में पत्रिका ग्यारहवें

वर्ष में प्रवेश करेगी। अपने सफर के दस वर्ष के अनुभव को विस्तार देने

तथा मीडिया में शोध प्रकाशन की जरूरत की पूर्ति करने की दृष्टि से समागम

का प्रकाशन मीडिया की शोध पत्रिका के रूप में होगा। उन्होंने मीडिया में

शोध कर रहे साथियों से प्रकाशन सामग्री भेजने का आग्रह किया है।

विज्ञप्ति में जानकारी दी गई है कि समागम के फरवरी अंक से कुछ पन्ने

सिनेमा पर भी होंगे। सिनेमा में गंभीर लेखन को बढ़ावा दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश फिल्म विकास निगम ने पटककथा नामक पत्रिका का

प्रकाशन किया था। निगम के बंद हो जाने के साथ ही फिल्म मीडिया की गंभीर

पत्रिका पटकथा का प्रकाशन भी बंद हो गया। पटकथा की तर्ज पर समागम में

सिनेमा पर सामग्री दी जाएगी। समागम को शोध पत्रिका के रूप में विकसित

करने के साथ ही पत्रिका के पृष्ठों में वृद्धि करने की भी योजना है।

शोध आलेख भेजने के लिये डाक का पता है सम्पादक समागम, ३, जूनियर एमआयजी,

अंकुर कॉलोनी, शिवाजीनगर, भोपाल-१६ अथवा मेल कर सकते हैं -

k.manojnews@gmail.com

खादी और गांधी पहले से ज्यादा प्रासंगिक हो रहे हैं-रघु ठाकुर

भोपाल। ‘खादी केवल वस्त्र नहीं बल्कि वह अनेक आयामों से जुड़ा हुआ है. जैसे जैसे समय गुजरता जा रहा है, वैसे वैसे खादी और गांधी अधिक प्रासंगिक...