शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

शोध पत्रिका समागम का अगस्त अंक जनक्रांति 2014 व्हाया सोशल मीडिया

आप सभी को स्वाधीनता पर्व की हार्दिक शुभकानाएं।

शोध पत्रिका समागम के अगस्त अंक का केंद्रीय विषय जनक्रांति 2014 व्हाया सोशल मीडिया है।  भारत में पहली क्रांति से हमें आज़ादी मिली। इसके बाद आपतकाल के बाद एक क्रांति हुई और अब सोशल मीडिया के जरिये जनक्रांति 2014 में हुई है जिसके परिणामस्वरूप देश में तीस वर्ष बाद किसी दल को पूर्ण बहुमत मिला है. गठबंधन सरकारों का सिलसिला समाप्त हुआ है. अन्ना हज़ारे से लेकर अब तक के बदलाव की मीमांषा करता समागम का नया अंक जारी कर दिया गया है. 

शोध पत्रिका समागम का अगला अंक हिंदी का महागीत : लता मंगेशकर पर है.

खादी और गांधी पहले से ज्यादा प्रासंगिक हो रहे हैं-रघु ठाकुर

भोपाल। ‘खादी केवल वस्त्र नहीं बल्कि वह अनेक आयामों से जुड़ा हुआ है. जैसे जैसे समय गुजरता जा रहा है, वैसे वैसे खादी और गांधी अधिक प्रासंगिक...