रविवार, 19 मई 2019

सुमिरन बैरागी


बालकवि होना तो एक बार आसान हो सकता है लेकिन सत्ता के साथ होते हुए बैरागी होना असम्भव ना भी हो तो मुश्किल ज़रूर है लेकिन बैरागी बन कर सत्ता के साथ रहकर लोक धर्म निभाने वाले बालकवि बैरागी बिरले लोगों मैं एक है। भौतिक रूप से वे अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन साहित्य, राजनीति और पत्रकारिता में जो प्रतिमान उन्होंने गढ़े, वह मार्गदर्शक बनकर हमारे साथ हैं. "समागम" के इस अंक में सुमिरन बैरागी पर केंद्रित है.

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