सोशल मीडिया को दोष देना आसान है लेकिन हम क्या कर रहे हैं, यह हम नहीं सोचते हैं. प्राब्लम सोशल मीडिया नहीं है बल्कि आपस में कम्युनिकेशन नहीं होना प्राब्लम है. संवादहीनता से उबर जाएंगे तो सोशल मीडिया हमारे लिए उपयोगी हो जाएगा. आइए सुनते हैं
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
जिम्मेदार नागरिक बनने का वक्त
प्रो. मनोज कुमार किसी भी किस्म का संकट हमेशा समाधान की ओर लेकर जाता है. और कोई भी संकट स्थायी नहीं होता है. हमारी पीढ़ी ने कोविड महामारी क...
-
-अनामिका कोई यकीन ही नहीं कर सकता कि यह वही छत्तीसगढ़ है जहां के लोग कभी विकास के लिये तरसते थे। किसी को इस बात का यकिन दिलाना भी आस...
-
समागम का नया अंक आदिवासी और मीडिया पर केन्द्रीत भोपाल से प्रकाशित मीडिया पर एकाग्र मासिक पत्रिका समागम का नवम्बर २०१० का अंक आदिवासी और मीड...
-
मनोज कुमार कोविड की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। कल क्या होगा, किसी को खबर नहीं है लेकिन डर का साया दिन ब दिन अपना आकार बढ़ा रहा है। कोरो...
