दुनिया ने कहा ईश्वर ही सत्य है और गांधी ने कहा सत्य ही ईश्वर-अनुराधा शंकर सिंह
आने वाले समय में गूगल बाबा रिपोर्टिंं भी होने लगे तो अचरज नहीं करना चाहिए -गिरिजाशंकर
वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश£ेषक श्री गिरिजाशंकर ने कहा कि- ‘हर नई चीज के साथ संभावना के दरवाजे खुलते हैं. डिजीटल एज में भी यही हो रहा है.’ उन्होंने कहा कि हालांकि सबकुछ अच्छा भी नहीं होता है, जैसे पहले आँखों देखी रिपोर्टिंग होती थी, अब कानों सुनी रिपोर्टिंग हो रही है और आने वाले समय में गूगल बाबा रिपोर्टिंं भी होने लगे तो अचरज नहीं करना चाहिए.
सब कुछ यांत्रिक हो गया है तो परेशानी बढ़ी है- डॉ. सुधीर सक्सेना
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सुधीर सक्सेना ने कहा कि- ‘इस कठिन समय में गांधी पर केन्द्रित अंक का प्रकाशन अपने आपमें साहस का कार्य है और ‘समागम यह कर रहा है.’ उन्होंने डिजीटल ऐरा में कम्युनिकेशन की चुनौती के बारे में कहा कि अब सब कुछ यांत्रिक हो गया है तो परेशानी बढ़ी है।
यह संघर्ष नहीं आनंद की पत्रिका-मनोज कुमार
कार्यक्रम के आरंभ में आधार वक्तव्य में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त रिसर्च जर्नल ‘समागम’ के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री मनोज कुमार ने कहा कि- ‘जिस दिन पत्रिका की समाज को आवश्यकता नहीं होगी, इसका प्रकाशन स्थगित कर दिया जाएगा. यह संघर्ष नहीं आनंद की पत्रिका है.’ आयोजन को परम्परागत स्वागत से दूर रखा गया और वक्ता में किसी को भी मुख्य अतिथि या कार्यक्रम अध्यक्ष बताने के स्थान पर सबको एक जैसा रखकर समाज में नवाचार आरंभ किया गया. कार्यक्रम में लेखक संजय सक्सेना की किताब ‘डायरी का आखिरी पन्ना’ का विमोचन अतिथियों ने किया. आयोजन में पीआरएसआई सहयोगी थे.
‘समागम’ के 25वें वर्ष के अवसर पर लोकमाता अहिल्या, स्वामी विवेकानंद के नाम पर स्थापित सम्मान से शिक्षा के क्षेत्र में अहा जिंदगी एवं मधुरिमा की संपादक सुश्री रचना संमदर एवं आरती सारंग को, ज्ञान के क्षेत्र में रंग निदेशक श्री संजय मेहता एवं डॉ. मोना परसाई को, समाजसेवा के क्षेत्र में सुप्रीमकोर्ट की एडवोकेट सुश्री गुंजन चौकसे एवं भक्ति शर्मा को प्रदान किया गया. स्वामी विवेकानंद युवा प्रतिभा सम्मान भास्कर के पुस्तकालय प्रभारी श्री केशव किशोर एवं युवा फिल्ममेकर आदित्य चौरसिया को तथा अभ्युदय समागम सम्मान पीएससी टॉपर सुश्री हर्षिता दवे एवं डॉ. नरेन्द्र त्रिपाठी को प्रदान किया गया.
कार्यक्रम का संचालन पूर्वा शर्मा त्रिवेदी ने किया एवं साहित्यकार श्री संजीव परसाई ने आभार व्यक्त किया.
.jpg)
.jpg)
