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अहा! सच में अहा
अहा! सच में अहा देश की सुपरिचित पत्रिका ",अहा! ज़िंदगी" में छपना हमेशा से उत्साहित करता रहा है। कोई चालीस साल पहले "धर्मयु...
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समागम का नया अंक आदिवासी और मीडिया पर केन्द्रीत भोपाल से प्रकाशित मीडिया पर एकाग्र मासिक पत्रिका समागम का नवम्बर २०१० का अंक आदिवासी और मीड...
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मनोज कुमार कोविड की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। कल क्या होगा, किसी को खबर नहीं है लेकिन डर का साया दिन ब दिन अपना आकार बढ़ा रहा है। कोरो...
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-अनामिका कोई यकीन ही नहीं कर सकता कि यह वही छत्तीसगढ़ है जहां के लोग कभी विकास के लिये तरसते थे। किसी को इस बात का यकिन दिलाना भी आस...
आज दुनिया पहले से कहीं अधिक जुड़ गई है, लेकिन हिन्दी ने भी अपनी मजबूत पहचान बनाए रखी है। इंटरनेट, सोशल मीडिया, फिल्मों और डिजिटल माध्यमों ने हिन्दी को नए पाठक और नए मंच दिए हैं। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
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