हिन्दी हैं हम, हिन्दोस्तां हमारा...
उतंड मार्तंड से लेकर हिन्दी को राष्ट्रभाषा के लिए पैरवी करते महात्मा गाँधी का प्रथम उद्घोष इंदौर से...
बार बार फोन की तरफ ध्यान जा रहा है, लगता है कि दूसरी तरफ से आवाज आएगी... मनोज भाई, आप पहुंचे नहीं। जल्दी आइए, और हां, मैं केके को बोल...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें