लगभग एक सप्ताह बाद मध्यप्रदेश अपनी एक और वर्षगांठ मनायेगा। मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार को एक तरफ जहां लगातार पांच बार राज्योत्सव मनाने का अवसर मिला है वहीं भाजपा सरकार इस राज्योत्सव को एक नयी पहचान देने जा रही है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान की पहल पर फैसला लिया है कि राज्यगीत बनाया जाएगा। संभवतः मध्यप्रदेश पहला राज्य होगा जहां इस तरह की पहल हो रही है। अभी तक किसी राज्य का कोई राज्यगीत जैसी परम्परा रही है। भाषाई विवाद से परे इस पहल का स्वागत किया जाना चाहिए। राज्यगीत बने, इसका सभी स्वागत करेंगे किन्तु अपेक्षा होगी कि यह गीत किसी विचारधारा अथवा पार्टी प्रेरित न होकर राज्य को प्रतिबिम्बित करने वाला हो तो सुखकर होगा। यहां स्मरण दिलाना होगा कि भोपाल के लेखक एवं प्रोफेसर पुरूषोत्तम चक्रवर्ती ने काफी पहले एक ऐसा गीत तैयार किया है जिसमें सम्पूर्ण मध्यप्रदेश की झलक देखने को मिलती है। इस गीत का प्रकाशन संभवतः राज्य शिक्षा केन्द्र ने अपने किसी प्रकाशन में किया है। राज्यगीत बनना ऐतिहासिक कदम है और इसे इसी सोच के साथ बनाया जाना चाहिए। अपेक्षा होगी कि मध्यप्रदेश और मध्यप्रदेश से बाहर रह रहे बुद्विजीवी भी इस दिशा में सरकार को अपनी सलाह भेजें ताकि राज्यगीत मुकम्मल चेहरा पा सके।
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2009
अपना राज्य
लगभग एक सप्ताह बाद मध्यप्रदेश अपनी एक और वर्षगांठ मनायेगा। मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार को एक तरफ जहां लगातार पांच बार राज्योत्सव मनाने का अवसर मिला है वहीं भाजपा सरकार इस राज्योत्सव को एक नयी पहचान देने जा रही है। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान की पहल पर फैसला लिया है कि राज्यगीत बनाया जाएगा। संभवतः मध्यप्रदेश पहला राज्य होगा जहां इस तरह की पहल हो रही है। अभी तक किसी राज्य का कोई राज्यगीत जैसी परम्परा रही है। भाषाई विवाद से परे इस पहल का स्वागत किया जाना चाहिए। राज्यगीत बने, इसका सभी स्वागत करेंगे किन्तु अपेक्षा होगी कि यह गीत किसी विचारधारा अथवा पार्टी प्रेरित न होकर राज्य को प्रतिबिम्बित करने वाला हो तो सुखकर होगा। यहां स्मरण दिलाना होगा कि भोपाल के लेखक एवं प्रोफेसर पुरूषोत्तम चक्रवर्ती ने काफी पहले एक ऐसा गीत तैयार किया है जिसमें सम्पूर्ण मध्यप्रदेश की झलक देखने को मिलती है। इस गीत का प्रकाशन संभवतः राज्य शिक्षा केन्द्र ने अपने किसी प्रकाशन में किया है। राज्यगीत बनना ऐतिहासिक कदम है और इसे इसी सोच के साथ बनाया जाना चाहिए। अपेक्षा होगी कि मध्यप्रदेश और मध्यप्रदेश से बाहर रह रहे बुद्विजीवी भी इस दिशा में सरकार को अपनी सलाह भेजें ताकि राज्यगीत मुकम्मल चेहरा पा सके।
बुधवार, 21 अक्टूबर 2009
ख़बर
अरे ये क्या हो गया?
रिपोर्टर
मध्यप्रदेश के प्रभावशाली आइएएस मनोज श्रीवास्तव को जब संस्कृति सचिव के पद से मुक्त किया गया तो गूंज उठी कि मुख्यमंत्री और उनके बीच थोड़ी दूरी बन गई है और जल्द ही वे आयुक्त जनसम्पर्क के पद से भी मुक्त कर दिये जाएंगे। कयासों का दौर अभी शुरू ही हुआ था कि मुख्यमंत्री ने अचानक एलान कर दिया कि प्रदेश में भूमि घोटाले की जांच आइएएस मनोज श्रीवास्तव करेंगे। इसके लिये एक सदस्यीय जांच समिति बनायी गयी जिसमें वे अकेले रहेंगेे।मुख्यमंत्री के इस फरमान से कई की जान अधर में लटक गई। कहां तो तय था कि श्रीवास्तवजी के पर कतरे जाएंगे कहां उन्हें उड़ने के लिये पूरा आसमान दे दिया गया। आइएएस आफिसरों में इसकी धमक तो हुई होगी,उससे कहीं ज्यादा मीडिया और राजनीतिक प्रेक्षकों के बीच हुई है। श्रीवास्तवजी से सद्भावना रखने वालांे को मुख्यमंत्री का यह एलान दीपावली के तोहफे की तरह है तो उनसे मनभेद रखने वालों के लिये अब समस्या खड़ी हो गई है कि वापस पटरी कैसे बिठायी जाए। यूं भी मुख्यमंत्री प्रदेश के हित में अफसरशाही मंे फेरबदल करते रहे हैं। दर्जनों आफिसर इधर से उधर कर दिये गये लेकिन किसी की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा किन्तु लगभग एक सप्ताह पहले आइएएस मनोज श्रीवास्तव को संस्कृति सचिव पद से हटाया गया तो अवसाद और उत्सव का माहौल बन गया। लगभग चार वर्ष से श्री श्रीवास्तव मुख्यमंत्री के सबसे विश्वस्त अफसरों में गिने जाते हैं। मुख्यमंत्री का यह भरोसा थोड़े से अफसरों को मिलता है और उनमें ये एक हैं। यह बात एक बड़े वर्ग को रास नहीं आयी और उन्हें हटाने की जुगत की जाने लगी। लोगों की मानें तो उनकी इच्छा जनसम्पर्क को छोड़ने की है लेकिन मुख्यमंत्री ऐसा नहीं चाहते हैं। वे जानते हैं कि सरकार की नीतियांे, कार्यक्रमों और मुख्यमंत्री की छवि स्थापित करने में बतौर आयुक्त जनसम्पर्क उन्होंने बेहतर काम किया है। फिलवक्त, मुख्यमंत्री ने एक बार फिर संदेश दे दिया है कि अभी तो मनोज श्रीवास्तव का कोई विकल्प नहीं।
रविवार, 18 अक्टूबर 2009
मीडिया
मीडिया खबर - भारत की पहली द्विभाषीय मीडिया वेबसाइट
मीडिया खबर.कॉम ने हिंदी के बाद अब अपना अंग्रेजी संस्करण भी लॉन्च कर दिया है. हालाँकि इसका बीटा संस्करण पहले ही लॉन्च कर दिया गया था. लेकिन विधिवत रूप से इसको आज दीपावली के दिन लॉन्च किया गया. अंग्रेजी संस्करण को मीडिया मंत्र के नाम से शुरू किया गया है. इस तरह से मीडिया खबर.कॉम देश की पहली ऐसी मीडिया वेबसाइट बन गयी है जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों में है. अंग्रेजी साईट के लॉन्च होने से ग्लोबल स्तर पर मीडिया खबर.कॉम का दायरा और बढ़ गया है. अभी मीडिया खबर.कॉम को भारत के अलावा तक़रीबन 40से अधिक देशों में देखा जाता है.
मीडिया खबर.कॉम को जब साल 2008 में लॉन्च किया गया था, उस वक़्त हिंदी में मीडिया साईट का नितांत अभाव था. मीडिया खबर.कॉम एक बिलकुल नए कांसेप्ट के साथ आया था, जिसे लोगों ने सराहा भी. अपनी विश्वसनीयता को कायम रखते हुए मीडिया खबर.कॉम ने अपना आगे का सफ़र जारी रखा.
मीडिया खबर.कॉम के संस्थापक और संपादक पुष्कर पुष्प ने कहा कि - " साल 2008 में जब हम मीडिया खबर.कॉम को लेकर आये थे, उस समय हिंदी में मीडिया की ख़बरों को कवर करने का कोई कांसेप्ट नहीं था. मीडिया में रूची रखने वाले हिंदी के पाठकों को मजबूरन अंग्रेजी के मीडिया वेबसाईटों पर जाना पड़ता था, जहाँ हिंदी मीडिया की खबरें काफी कम रहती है. हमने पहली बार हिंदी मीडिया में रूची रखने वाले लोगों और मीडियाकर्मियों के लिए एक प्लेटफॉर्म तैयार किया.इसके पहले साल 2007 में हमने मीडिया पर केन्द्रित हिंदी की मासिक पत्रिका मीडिया मंत्र को लॉन्च किया था. वह भी अपने आप में एक नयी पहल थी. अब अपने अगले पड़ाव के रूप में हमने मीडिया खबर.कॉम का अंग्रेजी संस्करण लॉन्च किया है. अब हम विस्तार की प्रक्रिया में आ गए हैं और आगे आने वाले दिनों में कई और नयी शुरुआत करने जा रहे है. मीडिया खबर.कॉम बहुत जल्द आपको नए स्वरुप में नज़र आएगा. कई परिवर्तन भी आपको देखने को मिलेंगे. लेकिन हम जो भी काम करेंगे, उसमें अपनी पूरी विश्वसनीयता बनाये रखने की कोशिश करेंगे. विश्वसनीयता बनाये रखते हुए, अपना काम ईमानदारी से करते रहना हमारी प्राथमिकता की सूचि में सबसे ऊपर है. "
गौरतलब है की मीडिया खबर.कॉम, यंग इमेज कम्युनिकेशन की पहल है. यंग इमेज कम्युनिकेशन ही मीडिया की लोकप्रिय मासिक पत्रिक "मीडिया मंत्र" को चलाती है. मीडिया खबर.कॉम के अंग्रेजी संस्करण का वेब पता है : www.mediakhabar.com/english
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2009
आमंत्रण
पहली खबर
दोस्तो, पत्रकारिता की दुनिया से आपका पुराना रिश्ता रहा है. मेरा आग्रह है कि आप पत्रकारिता के आरंभिक दिनों को याद करें और उस पहली खबर को जरूर याद करें जिसे आपने किसी अखबार अथवा पत्रिका के लिये लिखा था. उस खबर को लिखने का उत्साह, जद्दोजहद और छप जाने के बाद पढ़ने का सुख आदि आदि बातों को एक बार फिर पहली खबर की तरह शब्दों में बांधने का प्रयास करें. खबर कौन सी थी उस पर भी विस्तार से बात की जाए तो मजेदारी होगी. आपके इन संस्मरणों को हम मीडिया पर एकाग्र मासिक पत्रिका समागम में प्रकाशित करना चाहेंगे। पहली खबर के साथ अपनी एक तस्वीर हमें जरूर भेजें. डाक से भेजना चाहें तो पता है संपादक समागम ३, जू. एमआईजी, द्वितीय तल, अंकुर कॉलोनी, शिवाजीनगर, भोपाल-462016 मो. 09300469918 E-mail: k.manojnews@gmail.com
रविवार, 11 अक्टूबर 2009
मीडिया
क्यों बंद हो जाते हैं कॉलम?
राजधानी भोपाल के एक बड़े अखबार ने एकाएक सारे खबरी कॉलम बंद कर दिये जाने से पत्रकारों के साथ पाठकों में भी हैरत है। आखिरी अचानक ऐसा क्यों किया गया? यूं भी अखबारों में साप्ताहिक कॉलम लिखने की आजादी पत्रकारों को मिलती है। संभवत: इस कॉलम लिखवाने के पीछे संपादक का उद्देश्य संभवत: यही होता है कि जो तथ्य खबरों के माध्यम से पाठकों तक नहीं पहुंच पाती हैं, वह कॉलम के माध्यम से पाठकों तक पहुंच जाएं। इससे पत्रकार को भी यह लाभ होता है कि लोग जान जाते हैं कि अमुक विभाग की खबर कौन लिख रहा है। पत्रकार की वि·ासनीयता और प्रतिष्ठा दोनों बढ़ती है। कॉलम छपता रहे यहां तो ठीक हैं लेकिन अचानक बिना किसी सूचना कॉलम बंद कर दिया जाना पाठकों के हित में नहीं है।
मीडिया
अंजनी भास्कर रायपुर में एनीपत्रकार अंजनी कुमार झा भास्कर रायपुर में समाचार संपादक बनाये गये हैं. टेलीफोन पर स्वयं श्री झा ने इसकी सूचना दी. श्री झा इसके पहले न्यूज एजेंसी हिन्दुस्तान समाचार एवं नवभारत में काम कर चुके हैं. मूलत: बिहार के रहने वाले अंजनी कुछ वर्ष पहले ही मध्यप्रदेश की पत्रकारिता में सक्रिय हुए. मध्यप्रदेश जनसम्पर्क संचालनालय द्वारा दिया जाने वाला राजेन्द्र माथुर पत्रकारिता फेलोशिप, स्वराज संस्थान संचालनालय का स्वाधीनता फेलोशिप मिल चुका है. मध्यप्रदेश साहित्य परिषद द्वारा उनकी पांडुलिपि के लिये आर्थिक सहायता भी मिली है.
सोमवार, 5 अक्टूबर 2009
कुछ अलग
गिरमिटया महात्मा गांधी
आप हम जिन्हें गिरमिटिया कहते हैं, वे सब हमारे भारतीय हैं. आज भारतीय गिरमिटियों का व्यापक संसार है. साहित्य, संस्कृति एवं कला की उनकी दुन...
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-अनामिका कोई यकीन ही नहीं कर सकता कि यह वही छत्तीसगढ़ है जहां के लोग कभी विकास के लिये तरसते थे। किसी को इस बात का यकिन दिलाना भी आस...
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समागम का नया अंक आदिवासी और मीडिया पर केन्द्रीत भोपाल से प्रकाशित मीडिया पर एकाग्र मासिक पत्रिका समागम का नवम्बर २०१० का अंक आदिवासी और मीड...
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मनोज कुमार कोविड की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। कल क्या होगा, किसी को खबर नहीं है लेकिन डर का साया दिन ब दिन अपना आकार बढ़ा रहा है। कोरो...