मंगलवार, 5 अगस्त 2025

कम्युनिकेशन नहीं होना प्राब्लम


सोशल मीडिया को दोष देना आसान है लेकिन हम क्या कर रहे हैं, यह हम नहीं सोचते हैं. प्राब्लम सोशल मीडिया नहीं है बल्कि आपस में कम्युनिकेशन नहीं होना प्राब्लम है. संवादहीनता से उबर जाएंगे तो सोशल मीडिया हमारे लिए उपयोगी हो जाएगा. आइए सुनते हैं

सोमवार, 4 अगस्त 2025

‘कटहल’ का स्वाद और ‘12th फेल’’ की कामयाबी

प्रो. मनोज कुमार

मध्यप्रदेश सिनेमा के लिए हमेशा से ऊर्वरा भूमि रही है. संभवत: अपने जन्म के साथ ही रजतपट पर मध्यप्रदेश का दबदबा रहा है. साल 2025 के राष्ट्रीय पुरस्कारों में कटहल और  ‘12th फेल’’ नें पुरस्कार जीत कर यह एक बार फिर प्रमाणित हो गया कि रजतपट में मध्यप्रदेश का कोई सानी नहीं. इन पुरस्कारों के साथ ही मध्यप्रदेश में फिल्म सिटी को आकार लेने के दावों को एक और वजह मिल गई है. ‘कटहल’ के युवा निर्देशक और पटकथा लेखक मध्यप्रदेश के हैं. युवा निर्देशक यशोवर्धन एवं पटकथा लेखक अशोक मिश्र का रिश्ता पिता-पुत्र का है. खास बात यह है कि ‘कटहल’ यशोवर्धन निर्देशित पहली फिल्म है. इसी तरह ‘12ह्लद्ध फेल’ फेल एक ऐसे युवा की सच्ची कहानी है जिसने अपने आत्मविश्वास से नाकामयाबी को कामयाबी में बदल दिया. ऐसे युवक मनोज कुमार शर्मा का रिश्ता मध्यप्रदेश से हैं और वह वर्तमान में भारतीय पुलिस सेवा के उच्चाधिकारी हैं. उनकी कहानी को अनुराग पाठक ने ऐसे पिरोया कि ‘12th फेल’ ने ना केवल दर्शकों का दिल जीत लिया बल्कि एक बड़े निराश युवावर्ग में उत्साह का संचार किया.

‘कटहल’ का स्वाद और ‘12th फेल’ की कामयाबी से मध्यप्रदेश के सिने प्रेमियों का चेहरा खिल उठा. यह स्वाभाविक भी है और होना भी चाहिए. इस कामयाबी के बहाने फिल्म सिटी की संभावना और मध्यप्रदेश का रजतपट पर योगदान को भी समझा जा सकता है. मध्यप्रदेश हमेशा से सिनेमा के लिए मुफीद रहा है. शोमेन राजकपूर से लेकर दिग्गज फिल्म निर्देशक प्रकाश झा को मध्यप्रदेश लुभाता रहा है. यही नहीं, राजकपूर, पे्रमनाथ और सदी के नायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन का ससुराल भी मध्यप्रदेश है. लता मंगेशकर से लेकर किशोर कुमार, अशोक कुमार, अनूप कुमार, जया भादुड़ी, निदा फाजली, अन्नू कपूर जैसे अनेक नाम लिए जा सकते हैं तो पटकथा लेखकों में जावेद अख्तर और सलीम को कौन भुला सकता है? पीयूष मिश्रा की अदायगी, लेखन और आवाज के तो युवा पीढ़ी दीवानी है. यह तो थोड़े नाम हैं जिनके बिना रजतपट पर रंग नहीं चढ़ता है. नए समय में यशोवर्धन जैसे निर्देशक उम्मीद जगाते हैं. यहां इस बात का स्मरण कर लेना चाहिए कि बीते एक दशक में अनेक मल्टीस्टारर फिल्मों और टेलीविजन सीरियल्स के साथ वेबसीरिज का निर्माण हो रहा है. यह मध्यप्रदेश के कलाकारोंं, पटकथा लेखकों और तकनीकी जानकारों के लिए सुनहरा अवसर है. इस संभावना के साथ मध्यप्रदेश में फिल्मसिटी बनाने के लिए लम्बे समय से प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अभी तक फिल्मसिटी की योजना मूर्तरूप नहीं ले सका है. यह एक टीस देने वाली बात है.

उल्लेखनीय है कि कभी मध्यप्रदेश फिल्म विकास निगम नाम से फिल्मों निर्माण एवं इससे संबंधित पक्षों को प्रोत्साहित करने की मकबूल संस्था थी. अनेक कारणों और नाकामी के चलते इसे बंद कर दिया गया. फिल्म विकास निगम के विसर्जन के साथ सिनेमा की असीमित संभवनाएं भी हाशिए पर चली गई. सबसे बड़ा नुकसान हुआ फिल्म विकास निगम द्वारा प्रकाशित गंभीर वैचारिक पत्रिका ‘पटकथा’ का अवसान. फिल्मसिटी के साथ इन सबको पुर्नजीवन देने की एक बार फिर जरूरत महसूस की जा रही है. मध्यप्रदेश में सिनेमा और फिल्मसिटी की जमीन तलाशने वाले श्रीराम तिवारी के हिस्से में फिल्म विकास निगम की जिम्मेदारी थी और आज वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन  यादव के संस्कृति सलाहाकार हैं तो सहज अपेक्षा होती है कि रजतपट पर मध्यप्रदेश की सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने और मध्यप्रदेश की सिने प्रतिभाओं को तराशने के लिए अपने पुरानी पहल को आगे बढ़ाएं. 

प्रसंगवश याद दिला देना जरूरी हो जाता है कि अगस्त 2025 में अपने पचास साल पूरा करने जा रही फिल्म ‘शोले’ का मध्यप्रदेश कनेक्शन रहा है. फिल्म में अमितभ बच्चन, जया भादुड़ी, जगदीप ने अभिनय किया तो सलीम-जावेद की जोड़ी भी मध्यप्रदेश से ही है. और तो और गब्बर को कैसा अभिनय करना है, यह पाठ भी अमजद खान ने देश के सुपरिचित पत्रकार एवं लेखक तरूण कुमार भादुड़ी की पुस्तक ‘अभिशप्त चंबल’ से किया. इस समय भोपाल में रंगमंच में सक्रिय राजीव वर्मा एवं रीता (भादुड़ी) वर्मा का भी हिन्दी सिनेमा में योगदान रहा है. अनेक फिल्मो में वर्मा दंपत्ति ने अपनी छाप छोड़ी है. इसी तरह वरिष्ठ रंग निर्देशक संजय मेहता भी रंगमंच के साथ लगातार फिल्मों में काम कर रहे हैं. हालिया ‘धडक़न-2’ में भी उनकी भूमिका उल्लेखनीय है. ऐसे में मध्यप्रदेश में फिल्म सिटी की अनिवार्यता हो जाती है.

देश का दिल मध्यप्रदेश सिनेमा के लिए सौफीसद माकूल है. लोकेशन के लिहाज से, अभिनय और कथानक की दृष्टि से और सुरक्षा और सुरक्षित होने की दृष्टि से. प्रकाश झा ने आरक्षण, राजनीति और चक्रव्यूह जैसी बड़ी फिल्मों का निर्माण मध्यप्रदेश की जमीं पर किया. इसके बाद उनकी वापसी कभी होगी, किसी नए विषय को लेकर लेकिन तब तक मझोले और छोटे फिल्मकार नियमित रूप से मध्यप्रदेश में सक्रिय हैं, उन्हें सुविधा मिलेगी तो मध्यप्रदेश की सिनेमा परिदृश्य उन्नत होगा. फिल्मसिटी बन जाने से टैक्स के रूप में ना केवल सरकार को राजस्व का लाभ होगा बल्कि कलाकारों को भी उचित मेहनताना मिल सकेगा. उम्मीद की जाना चाहिए कि सबके प्रयासों से फिल्मसिटी जल्द ही आकार लेगा. तब हम हर वर्ष राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बार बार ‘कटहल’ का स्वाद और ‘12th फेल’ की कामयाबी का जश्र मना सकेंगे. (लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया शिक्षा से संबद्ध हैं)

रविवार, 3 अगस्त 2025

कैंपस कॉरिडोर

 प्रो. उमा कांजीलाल वीसी इग्नू बनीं

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की कमान अब प्रो. उमा कांजीलाल संभालेंगी। वह इग्नू के इतिहास में पहली महिला कुलपति हैं। इससे पहले वह विश्वविद्यालय की प्रो-वाइस चांसलर के रूप में कार्यरत थीं। प्रो. कांजीलाल लंबे समय से शिक्षा जगत में काम कर रही हैं और उन्होंने डिजिटल लर्निंग, ई-एजुकेशन और ऑनलाइन एजुकेशन के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय योगदान दिए हैं. वे यूनिवर्सिटी लाइब्रेरियन, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की डायरेक्टर और ऑनलाइन एजुकेशन सेंटर की प्रमुख जैसी कई बड़ी भूमिकाओं में काम कर चुकी हैं. उनकी विशेषज्ञता डिजिटल लाइब्रेरी, ई-लर्निंग और मल्टीमीडिया कोर्स विकास में है.यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के द्वारा साझा की गई है।

एक लाख का द अप्पन मेनन मेमोरियल ट्रस्ट अवार्ड

विश्व मामलों, विकास समाचार और पर्यावरण समाचार के क्षेत्र में काम करने वाले भारत और दक्षिण एशिया के पेशेवर पत्रकार पत्रकारों को "द अप्पन मेनन मेमोरियल ट्रस्ट" पुरस्कार के लिए 12 सितंबर 2025 से पहले आवेदन जमा करना होगा। 3-5 साल के अनुभव वाले पत्रकार, किसी भी माध्यम के पत्रकारों को दिया जाता है।

यहां है रिक्तियां

सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान कोलकाता में प्रोफेसर, संपादक, सहायक संपादक्र ध्वनि रिकार्डिंग एवं डिजाइन, एनीमेटर, निज सहायक, कैमरा सहायक, प्रोजेक्शन सहायक एवं प्रकाश सहायक के एक-एक पद रिक्त हैं. यह सभी पद अनारक्षित हैं. अधिक जानकारी के लिए वेबसाइइट सर्च करें.

विजिटिंग फेकल्टी चाहिए 

मध्य प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ़ हॉस्पिटैलिटी ट्रेवल एंड टूरिज्म स्टडीज का प्रबन्धन, टूरिज्म, होटल मैनजमेंट एवं अंग्रेज़ी शिक्षण के लिए विजिटिंग फेकल्टी इंप्लनमेट करने के लिए आवेदन बुलाए हैं। आवेदन की आखिरी तारीख 18 अगस्त है। वेबसाइट देखें www.mpihttsbpl.gov.in 

बाल पुरस्कार के लिए आवेदन करें

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (पीएमआरबीपी) के लिए ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 15.08.2025 तक बढ़ा दी गई है। यह पुरस्कार उन बच्चों को दिया जाता है जो बहादुरी, सामाजिक सेवा,  पर्यावरण,  खेल,  कला और संस्कृति तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र से  है। पांच वर्ष से अधिक 18 वर्ष से कम आयु का कोई भी (31 जुलाई, 2025 तक) जो भारतीय नागरिक है और भारत में रहता है, पुरस्कार के लिए पात्र है।  

बीएसएसएस कॉलेज में दो नए कोर्स

बीएसएसएस कॉलेज,  सामाजिक कार्य विभाग और पुलिस विभाग के सहयोग से आज की सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप दो नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया है. यह कोर्स ऑनलाइन और ऑफ लाइन दोनों मोड में है. इसमें पुलिस विभाग के साथ 30 घंटे की इंटर्नशिप शामिल है। नए सर्टिफिकेट कोर्स है  1. v. Peace Studies, Justice, & Security Sector Governance. 2.Public Policy, Good Governance and Community-Based Access to Justice 

डॉ. दीपेश अवस्थी एडीटर प्रमोट

पत्रिका के सीनियर करसपांडेंट डॉ. दीपेश अवस्थी को प्रमोट कर संस्थान ने एडीटर नियुक्त किया है. वे होशंगाबाद एडीशन के एडीटर होंगे. लम्बे समय से पत्रिका में कार्यरत डॉ. अवस्थी की राजभवन एवं विधानसभा रिपोर्टिंग का लम्बा अनुभव है. वे अपनी खास खबरों के लिए पहचाने जाते रहे हैं. उनकी रूचि पढऩे में है और इसके चलते उन्होंने पत्रकारिता में पीएचडी की. 

मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के सम्मान

मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी ने वर्ष 2024 के लिए श्रेष्ठ कृतियों के लिए राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय सम्मानों का ऐलान कर दिया है. मध्यप्रदेश के लेखकों की प्रथम मौलिक कृति प्रकाशन के लिए पांडुलिपि प्रकाशन सहायता योजना के अंतर्गत बीस सामान्य वर्ग के और इतने ही आरक्षित वर्ग के लिए 20 हजार की राशि दी जाएगी. साथ ही अकादमी ने अखिल भारतीय स्तर के 13 सम्मानों का ऐलान किया है. इसमें सर्वश्रेष्ठ पुस्तकों को एक लाख एक लाख  रुपये का सम्मान दिया जाएगा. वहीं प्रत्येक के लिए 51 हजार सम्मान राशि के साथ 15 राज्य स्तरीय सम्मानों का भी ऐलान किया है. मध्यप्रदेश में बोलियों में लेखन को समृद्ध करने के लिए प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी विभिन्न बोलियों के लिए 6 सम्मानों का ऐलान किया है. श्रेष्ठ कृति को प्रत्येक वर्ग में 51 हजार सम्मान राशि दी जाएगी. विवरण के लिए मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के ऑफिशियल वेबसाइट पर देखा जा सकता है.

बातें हैं बातों का क्या

इन दिनों एक नम्बर और दो नम्बर में कौन कितना पॉपुलर का खेल चल रहा है. अपनी अपनी रूचि के अनुरूप दक्षता दिखा रहे हैं और शह-मात का खेल चल रहा है. दो नंबर भी एक नंबर की दौड़ में हैं और भरसक कोशिश में एक नंबर को मात देने की जुगत में हैं. अब देखें कौन, किसको मात देता है. अब बातें हैं बातों का क्या?

बुधवार, 30 जुलाई 2025

कैंपस कॉरिडोर

 प्रो. उमा कांजीलाल वीसी इग्नू बनीं

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की कमान अब प्रो. उमा कांजीलाल संभालेंगी। वह इग्नू के इतिहास में पहली महिला कुलपति हैं। इससे पहले वह विश्वविद्यालय की प्रो-वाइस चांसलर के रूप में कार्यरत थीं। प्रो. कांजीलाल लंबे समय से शिक्षा जगत में काम कर रही हैं और उन्होंने डिजिटल लर्निंग, ई-एजुकेशन और ऑनलाइन एजुकेशन के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय योगदान दिए हैं. वे यूनिवर्सिटी लाइब्रेरियन, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की डायरेक्टर और ऑनलाइन एजुकेशन सेंटर की प्रमुख जैसी कई बड़ी भूमिकाओं में काम कर चुकी हैं. उनकी विशेषज्ञता डिजिटल लाइब्रेरी, ई-लर्निंग और मल्टीमीडिया कोर्स विकास में है.यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के द्वारा साझा की गई है।

एक लाख का द अप्पन मेनन मेमोरियल ट्रस्ट अवार्ड

विश्व मामलों, विकास समाचार और पर्यावरण समाचार के क्षेत्र में काम करने वाले भारत और दक्षिण एशिया के पेशेवर पत्रकार पत्रकारों को "द अप्पन मेनन मेमोरियल ट्रस्ट" पुरस्कार के लिए 12 सितंबर 2025 से पहले आवेदन जमा करना होगा। 3-5 साल के अनुभव वाले पत्रकार, किसी भी माध्यम के पत्रकारों को दिया जाता है।

यहां है रिक्तियां

सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान कोलकाता में प्रोफेसर, संपादक, सहायक संपादक्र ध्वनि रिकार्डिंग एवं डिजाइन, एनीमेटर, निज सहायक, कैमरा सहायक, प्रोजेक्शन सहायक एवं प्रकाश सहायक के एक-एक पद रिक्त हैं. यह सभी पद अनारक्षित हैं. अधिक जानकारी के लिए वेबसाइइट सर्च करें.

विजिटिंग फेकल्टी चाहिए 

मध्य प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ़ हॉस्पिटैलिटी ट्रेवल एंड टूरिज्म स्टडीज का प्रबन्धन, टूरिज्म, होटल मैनजमेंट एवं अंग्रेज़ी शिक्षण के लिए विजिटिंग फेकल्टी इंप्लनमेट करने के लिए आवेदन बुलाए हैं। आवेदन की आखिरी तारीख 18 अगस्त है। वेबसाइट देखें www.mpihttsbpl.gov.in 

बाल पुरस्कार के लिए आवेदन करें

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (पीएमआरबीपी) के लिए ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 15.08.2025 तक बढ़ा दी गई है। यह पुरस्कार उन बच्चों को दिया जाता है जो बहादुरी, सामाजिक सेवा,  पर्यावरण,  खेल,  कला और संस्कृति तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र से  है। पांच वर्ष से अधिक 18 वर्ष से कम आयु का कोई भी (31 जुलाई, 2025 तक) जो भारतीय नागरिक है और भारत में रहता है, पुरस्कार के लिए पात्र है।  

बीएसएसएस कॉलेज में दो नए कोर्स

बीएसएसएस कॉलेज,  सामाजिक कार्य विभाग और पुलिस विभाग के सहयोग से आज की सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप दो नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया है. यह कोर्स ऑनलाइन और ऑफ लाइन दोनों मोड में है. इसमें पुलिस विभाग के साथ 30 घंटे की इंटर्नशिप शामिल है। 

नए सर्टिफिकेट कोर्स है  1. v. Peace Studies, Justice, & Security Sector Governance. 2.Public Policy, Good Governance and Community-Based Access to Justice 

डॉ. दीपेश अवस्थी एडीटर प्रमोट

पत्रिका के सीनियर करसपांडेंट डॉ. दीपेश अवस्थी को प्रमोट कर संस्थान ने एडीटर नियुक्त किया है. वे होशंगाबाद एडीशन के एडीटर होंगे. लम्बे समय से पत्रिका में कार्यरत डॉ. अवस्थी की राजभवन एवं विधानसभा रिपोर्टिंग का लम्बा अनुभव है. वे अपनी खास खबरों के लिए पहचाने जाते रहे हैं. उनकी रूचि पढऩे में है और इसके चलते उन्होंने पत्रकारिता में पीएचडी की. 

मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के सम्मान

मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी ने वर्ष 2024 के लिए श्रेष्ठ कृतियों के लिए राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय सम्मानों का ऐलान कर दिया है. मध्यप्रदेश के लेखकों की प्रथम मौलिक कृति प्रकाशन के लिए पांडुलिपि प्रकाशन सहायता योजना के अंतर्गत बीस सामान्य वर्ग के और इतने ही आरक्षित वर्ग के लिए 20 हजार की राशि दी जाएगी. साथ ही अकादमी ने अखिल भारतीय स्तर के 13 सम्मानों का ऐलान किया है. इसमें सर्वश्रेष्ठ पुस्तकों को एक लाख एक लाख  रुपये का सम्मान दिया जाएगा. वहीं प्रत्येक के लिए 51 हजार सम्मान राशि के साथ 15 राज्य स्तरीय सम्मानों का भी ऐलान किया है. मध्यप्रदेश में बोलियों में लेखन को समृद्ध करने के लिए प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी विभिन्न बोलियों के लिए 6 सम्मानों का ऐलान किया है. श्रेष्ठ कृति को प्रत्येक वर्ग में 51 हजार सम्मान राशि दी जाएगी. विवरण के लिए मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के ऑफिशियल वेबसाइट पर देखा जा सकता है.

बातें हैं बातों का क्या

इन दिनों एक नम्बर और दो नम्बर में कौन कितना पॉपुलर का खेल चल रहा है. अपनी अपनी रूचि के अनुरूप दक्षता दिखा रहे हैं और शह-मात का खेल चल रहा है. दो नंबर भी एक नंबर की दौड़ में हैं और भरसक कोशिश में एक नंबर को मात देने की जुगत में हैं. अब देखें कौन, किसको मात देता है. अब बातें हैं बातों का क्या?

मंगलवार, 29 जुलाई 2025

मन का रेडियो बजने दे ज़रा



प्रो. मनोज कुमार 

राष्ट्रीय प्रसारण दिवस की सभी रेडियो प्रेमी को शुभकामनाएं। ऐसे खूबसूरत अवसर पर यादें पुरानी ताज़ा हो जाती हैं। रेडियो से मेरा रिश्ता साल 1983 से आकाशवाणी रायपुर से शुरू हुआ। तब युववाणी प्रोग्राम हमारे कमल भइया (कमल शर्मा) के नियंत्रण में था। यह वक्त जोश और उत्साह का था लेकिन रेडियो की तमीज लेशमात्र नहीं थी। कमल भैया ने ट्रेनिंग दी और मेरा पहला प्रोग्राम सम्हाल लिया। कुछ सीख, कुछ डांट मिर्ज़ा मसूद भाई साहब से मिला। 

इसके बाद आकाशवाणी भोपाल से जुड़ गया। तब प्रकाश शुजालपुरकर से परिचय हुआ। यहीं सुषमा तिवारी दीदी एवं पुष्पा तिवारी दीदी से आत्मीय रिश्ता बना। यहां सीखने वाले गुरु प्रभु जोशी मिले। बातों ही बातों में सहजता से मुझे रेडियो नाटक एवं कहानी से रेडियो रूपांतरण करना सिखा दिया। 15-15 मिनिट की पचास लघु नाटक लिखवाया। इन नाटकों की मूल प्रति आज भी मेरे पास सुरक्षित है। आकाशवाणी भोपाल में हिंदी अधिकारी रहे यादवजी एवं राजीव श्रीवास्तव ने खूब सहयोग किया। 

समय बदला लोग बदले लेकिन हर दौर में आकाशवाणी के साथ मेरा रिश्ते और गहराता गया। तब समाचार संपादक संजीव शर्मा और सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर राजेश भट्ट के साथ काम करते हुए हमेशा लगा कि आकाशवाणी प्रोग्राम का हिस्सा हूं। संयुक्त, दीपा, पूर्वा, राशिद भाई और रानू का भी स्नेहिल सहयोग मिला। लीलाधर मंडलोई जी तब आकाशवाणी के निदेशक थे। उनकी देखरेख में कई प्रोग्राम किया। अब पूजा वर्धन जी भी उसी आत्मीयता के साथ जब तब बुला लेती हैं। मसला यह कि मेरी तबियत ख़राब होने पर पूजा जी रेगुलर अपडेट लेती रहीं। ऐसे में आकाशवाणी परिवार से खुद को अलग कैसे समझूं। 

इस बीच मध्य प्रदेश शासन की नवाचारी संस्था वन्या सामुदायिक रेडियो की स्थापना कर रही थी। तबके एमडी और बड़े भाई तुल्य श्रीराम तिवारी ने बतौर रेडियो समन्वयक मुझे जोड़ लिया। कुल जमा 8 सामुदायिक रेडियो स्टेशन स्थापित करने और संचालन का अनुभव मिला। ख़ास बात यह थी कि यह सभी रेडियो स्टेशन लोकल डायलॉग में प्रोग्राम बनाते थे। बेहतर संचालन और समन्वय की दृष्टि से प्रदेश की परिक्रमा करने का भी अवसर मिला।

प्रसारण की दुनियां में एक और टर्निग प्वाइंट आया जब मुझे तब के कुलपति जगदीश उपासने जी ने MCU में पहले रेडियो सलाहकार का दायित्व दिया। इस समय प्रो. संजय द्विवेदी कुलसचिव हुआ करते थे। यहां शुरू हुआ रेडियो कर्मवीर की स्थापना की कार्यवाही। पेपरवर्क पूरा हुआ और आगे की कार्यवाही होती कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो गया। 18 माह के लिए सब कार्यवाही थम गई।

अब MCU के नए कुलपति बनकर प्रो. केजी सुरेश आए। कुछ पुराना दोस्ताना परिचय था। बधाई देने और चाय पीने पहुंचा तब बातों ही बातों में उन्होंने MCU में सामुदायिक रेडियो शुरू करने की बात कही। इस पर मैने पूरी कार्यवाही का विवरण बताया तो वे हक्के बक्के रह गए। तबके प्रशासन ने उन्हें अंधेरे में रख कर रेडियो के लिए नई प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी। कुलपति ने तत्काल कमेटी का गठन किया और मुझे उसका एक्सपर्ट के रूप में नामित किया। आखिरकार वह दिन आ ही गया जब रेडियो कर्मवीर बजने लगा। यहां भी डॉ. संजीव गुप्ता, प्रो. आशीष जोशी एवं अनुज डॉ. परेश उपाध्याय का खूब सहयोग मिला।

MCU के  इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट में रेडियो अध्यापन के लिए मुझे एडजंक्ट प्रोफेसर नियुक्त किया गया। सुख तो यह था कि स्टूडेंट्स के बीच ,"मनोज सर रेडियो वाले" कहलाने लगा। सामुदायिक रेडियो पर हिंदी में मेरी किताब साल 2016 में आ चुकी है।  मन का रेडियो बजने दे ज़रा

शनिवार, 26 जुलाई 2025

नागरिक बोध और नज़ीर बनता इंदौर



प्रो. मनोज कुमार

मध्यप्रदेश हमेशा की तरह स्वच्छता सर्वेक्षण में सबसे आगे रहा. लगातार 8वीं दफा इंदौर सिरमौर बना तो राजधानी भोपाल भी श्रेष्ठता का सिरमौर बना. मध्यप्रदेश के कुछ अन्य शहर भी स्वच्छता सर्वेक्षण में स्वयं को साबित किया। स्वच्छता सर्वेक्षण का यह परिणाम सचमुच मेें सुखदायक है और गर्व से कह सकते हैं कि देश का दिल मध्यप्रदेश अब एक स्वच्छता प्रदेश भी है। अब सवाल यह है कि पुरस्कारों का ऐलान हुआ, उत्सव हुआ, चर्चा हुई और असली मकसद स्वच्छता फिर कहीं तब तक के लिए हाशिए पर जाता दिख रहा है जब तक दुबारा स्वच्छता स्वच्छता सर्वेक्षण का सिलसिला आरंभ ना हो। यक्ष प्रश्र यह है कि क्या हम सिर्फ नम्बरों में आगे रहने के लिए ही स्वच्छ प्रदेश होने का प्रयास करते हैं या नागरिक बोध के साथ स्वच्छता की दिशा में कदम बढ़ाते हैं? पिछले सालों का अनुभव यही बताता है कि हमारी रूचि निरंतर स्वच्छ बने रहने से ज्यादा स्वच्छता सर्वेक्षण में सिरमौर बने रहने की है. स्वच्छता उत्सव चार दिनों का ना होकर पूर्ण नागरिक बोध से हो तो यह स्वच्छता  का नम्बरों का यह खेल एक दिन थम भी जाए तो हम गौरव से स्वयं महसूस कर सकें कि हम स्वच्छ प्रदेश के वासी हैं. लेकिन ऐसा करने वालों में एकमात्र शहर मध्यप्रदेश ही नहीं, देश में रहने वाला इंदौर है. पूर्ण नागरिक बोध के साथ इंदौर के नागरिक अपने दायित्व का निर्वहन करते हैं. इस बात पर कुछ लोग एतराज कर सकते हैं कि ये क्या बात हुई लेकिन सच यही है. 

इंदौर क्यों नागरिक बोध से भरा हुआ शहर है, यह जानना है तो उसकी राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पृष्ठभूमि को समझना होगा. राजनीति तो राजनीति होती है और सत्ता और शीर्ष पर बने रहने के लिए कुछ भी करेगा की नीति पर चलती है लेकिन आप जब इस पर विश£ेषण करेंगे तो पाएंगे कि इन सबके बावजूद इंदौर  की राजनीति इससे परे है और तब जब अपने शहर इंदौर की बात हो. इंदौर की अस्मिता और प्रतिष्ठा को लेकर सभी निर्दलीय हो जाते हैं. स्वच्छता को लेकर, नागरिक सुविधाओं को लेकर भी इंदौर का यही चरित्र रहा है. कदाचित कभी, कहीं इंदौर की स्थानीय राजनीति फेल हुई तो नागरिक इसका जिम्मा उठा लेते हैं. स्वच्छता सर्वेक्षण का सिलसिला जबसे आरंभ हुआ है, बच्चा-बच्चा स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी समझता है. शहर के वाशिंदें हों या शहर में आए मेहमान, उन्हें भी इंदौर की स्वच्छता की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है. एक कागज़ का टुकड़ा भी गलती से सडक़ पर फेंक दिया तो ना जाने कहां से कोई आएगा और आपसे कहेगा-भिया यहां नहीं. और वो खुुद उस कचरे को उठाकर डस्टबीन में डाल देगा. आमतौर पर निगम के स्वच्छता  साथियों के बारे में राय है कि वे अपने काम के प्रति संजीदा नहीं होते हैं. इस सोच पर इंदौर के निगम के स्वच्छता साथी थप्पड़ मारते हैं. वे स्वच्छता की जिम्मेदारी नौकरी के भाव से नहीं करते हैं बल्कि वे नागरिक बोध से भरकर इस जिम्मेदारी को सम्हालते हैं, पूरा करते हैं। यह बात सबसे सुंदर और सीखने वाली दूसरे शहरों के लिए है. स्वच्छता में सिरमौर बनने के लिए पहले और अभी के अफसरों में होड़ मची होती है कि उनके कार्यकाल के कारण इंदौर को यह कामयाबी मिली लेकिन वे भूल जाते हैं कि जिस शहर में नागरिक बोध ना हो, वहाँ व्यवस्था भी फेल हो जाती है. सिस्टम का काम बजट और सुविधा मुहय्या कराना है और उसकी मॉनिटरिंग करना लेकिन कार्य व्यवहार तो नागरिक बोध से ही आता है. कलश को श्रेय देने के बजाय बुनियाद को प्रणाम किया जाए तो इंदौर हमेशा स्वच्छ शहर बना रहेगा.

इंदौर को बार-बार स्वच्छता में श्रेष्ठता क्यों हासिल होता है, इस पर आपत्ति हो सकती है जिसका जवाब ऊपर लिखा जा चुका है. अब बड़ा सवाल यह है कि इंदौर जैसा नागरिक बोध अन्य शहरों में क्यों नहीं है? क्यों वहाँ पर इस बात की चिंता नहीं की जाती है कि इंदौर की तासीर में हम क्यों ना घुलमिल जाएँ. दूसरे शहरों में भी शहर को स्वच्छ रहने के लिए बजट और सुविधा आवंटित होता है लेकिन वह रूटीन में निपटा दिया जाता है. स्वच्छता सर्वेक्षण के समय जरूर दबाव रहता है कि हमें पुरस्कार जीतना है, सबसे आगे रहना है तो जाहिर है कि कागजी कार्यवाही पूरा कर कुछ पुरस्कार और नंबर पा लेते हैं. तमाम विषयों को लेकर शहर-दर-शहर विमर्श, गोष्ठी और संवाद का सिलसिला चलता है लेकिन शायद ही कहीं स्वच्छता पर विमर्श को लेकर संवाद का कोई सिलसिला शुरू हुआ हो. आमतौर पर हमारी मानसिकता है कि यह काम सरकार का है, नगर निगम का है, वो करे. इस मानसिकता के साथ हम कागजी तौर पर स्वच्छ शहर का तमगा तो पहन सकते हैं लेकिन खुद से सच का सामना नहीं कर सकते हैं.

यह हाल देश के सभी शहरों और राजधानी का है. स्वच्छता  मेंं सिरमौर बनने की दौड़ में शामिल शहरों की पोल हर बार बारिश खोल देती है और इस बार भी यही हो रहा है. सडक़ें और नालियाँ बजबजा गई हैं. पॉलिथीन और दूसरे कचरों से पानी निकासी की व्यवस्था चरमरा गई है. कम से कम उन शहरों से यह सवाल किया जा सकता है कि आप तो स्वच्छता सर्वेक्षण में सिरमौर रहे हैं, फिर ये संकट क्यों उत्पन्न हुआ? मामला साफ है कि हम कागज़ीतौर पर तो स्वच्छ हो गए लेकिन नागरिकबोध के अभाव में शहर को जमीनीतौर पर स्वच्छ नहीं रख पाए. इंदौर भी इस आरोप से पूरी तरह बरी नहीं है। अगले वर्ष फिर हम स्वच्छता उत्सव मनाएंगे. जिन शहरों के खाते में नंबर आएंगे, उन्हें शाबासी देेंगे औ जो पिछड़ जाएंगे, उनसे सवाल किए जाएंगे. यह सब प्रशासनिक प्रक्रिया है, चलती रहेगी. आपके घरों का कचरा उठाने के लिए आने वाली गाड़ी में बजने वाला गीत कहां गुम हो गया? स्वच्छता साथियों को  मिलने वाली सुरक्षा में भी ढील है, आखिर इसका दोषी कौन? मूल प्रश्र यह है कि स्वच्छता के लिए देश के हर नागरिक में अपने शहर के प्रति नागरिक बोध का भाव हो. नियमित रूप से स्वच्छता पर चर्चा, संवाद, संगोष्ठी हो. अपने शहर की अस्मिता और प्रतिष्ठा के लिए नागरिक जागरूकता, नागरिक बोध सर्वप्रथम है ताकि स्वच्छता उत्सव चलता रहे.(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया शिक्षा से संबद्ध हैं)

शुक्रवार, 18 जुलाई 2025

कैंपस कॉरिडोर


कंटेंट राइटर चाहिए 

'एचटी डिजिटल स्ट्रीम्स’ (HT Digital Streams) में कंटेंट राइटर के पद  के लिए योग्य  आवेदकों से आवेदन मांगे गए हैं।सोशल मीडिया पर शेयर विज्ञापन के अनुसार, यह नियुक्ति नोएडा के लिए होनी है । आवेदक के पास एक से डेढ़ साल का अनुभव होना चाहिए।आवेदक को अंग्रेजी (ऑनर्स) में ग्रेजुएट होना चाहिए। लेखन, संपादन और प्रूफ रीडिंग की क्षमता होनी चाहिए। विभिन्न विषयों पर रिसर्च और फैक्ट चेक करना आना चाहिए।

इंदौर फिल्मोत्सव-13वें वर्ष के लिए एंट्री भेजें 

सूत्रधार फ़िल्म सोसायटी, इंदौर द्वारा प्रति वर्ष आयोजित किया जाने वाला-"इंदौर फिल्मोत्स्व"इस वर्ष 28 सितंबर को होगा।इस वर्ष यह फ़िल्मोत्सव अपने 13 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।फिल्मकार अपनी शॉर्ट फिल्म, डॉक्युमेंट्री, एनिमेशन फ़िल्म या म्यूजिक वीडियो (अधिकतम अवधि-10 मिनट) 20 सितंबर तक सबमिट कर सकते है।sutradharindore@gmail.com पर ऑनलाइन भी फ़िल्में भेजी जा सकती है।अधिक विवरण के लिए 9827503834 या 9752222813 पर संपर्क किया जा सकता है। 

महाराष्ट्र में आशा रेडियो पुरस्कार

महाराष्ट्र सरकार ने पहली बार ‘महाराष्ट्र रेडियो फेस्ट 2025’ का आयोजन किया। जानी-मानी गायिका और पद्म विभूषण आशा भोसले के नाम पर स्थापित  आशा रेडियो पुरस्कार 2025’ से रेडियो के क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले प्रस्तोताओं को दिया गया।

विकास संवाद से यूं जुड़ें

विकास संवाद को कर्मठ साथी की तलाश है जिन्हें संचार, और नए संचार माध्यमों में काम करने का पूर्ण कौशल और समझ हो, स्टोरी टेलिंग की फनकारी से संस्था की कहानियों को आकार देकर विभिन्न माध्यमों में प्रभावी मौजूदगी दर्ज कराए। कंटेंट को डिजिटल कंटेंट में तब्दील करे और संस्था की आनलाइन प्रस्तुतियों को प्रभावी रूप देकर उन्हें चहुंओर पहुंचा सके।एआई का उपयोग सामाजिक विकास के विभिन्न आयामों में कर सके।  लंबे समय तक काम करने की प्रतिबद्धता हो।  विस्तृत जानकारी और विस्तृत विवरण (जेडी) के लिए संपर्क कर सकते हैं office@vssmp.org

 पूजा  डीडी के साथ बनी रहेंगी 

मनीष गौतम अब पीआईबी भोपाल के नए डायरेक्टर होंगे। पूजा वर्धन डीडी भोपाल में AIR के साथ बनी रहेंगी। उनका पीआईबी जाना कैंसिल हो गया है। मनीष के पास CG का एडिशनल चार्ज रहेगा। वर्तमान में AIR दिल्ली में पदस्थ संजय तिवारी अब AIR लखनऊ में पदस्थ होंगे। भोपाल PIB के ADG का अहमदाबाद के लिए रवाना तय हो गया है।

मीडिया एजुकेशन से होता मोहभंग

राजस्थान के एक निजी विश्वविद्यालय और मध्य प्रदेश के निजी विश्वविद्यालय में मीडिया पाठ्यक्रम बंद किए जाने की ख़बर है। बताया जा रहा है कि पूरी संख्या में एडमिशन ना मिल पाने के कारण यह फैसला लिया जा रहा है। इन विवि में पीएचडी कर रहे स्टूडेंट्स की पीएचडी पूरी होते ही मीडिया विभाग बंद करने की तैयारी है। 

दिग्विजय सिंह की चिट्ठी ने छीनी वाजपेई की कुर्सी 

कुलसचिव डॉ अविनाश वाजपेई को हटाकर, डीन प्रोफेसर पी. शशिकला को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया है। डॉ वाजपेई को हटाने की बातें लंबे समय से चल रही थी। एमसीयू स्टूडेंट एवं nsui से जुड़े तनय शर्मा के  fb पोस्ट की माने तो उन्होंने लिखा है कि प्रभारी कुलसचिव को हटाने के लिए  दिग्विजय सिंह ने वीसी को चिट्ठी लिखी थी। 

बातें हैं बातों का क्या

Mcu में कुलगुरु जल्द ही रोटेशन सिस्टम को एक्टिव कर सालों से जमे HOD के प्रभार में परिवर्तन करने वाले हैं। इसमें चार विभाग प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल बातें हैं, बातों का क्या।

लिव-इन रिलेशनशिप : स्वंतत्रता नहीं, स्वच्छंदता

लिव-इन रिलेशनशिप : स्वंतत्रता नहीं, स्वच्छंदता  प्रो. मनोज कुमार लिव-इन रिलेशनशिप  क्या भारतीय समाज और उसकी व्यवस्था के अनुरूप है? क्या इस...