रविवार, 13 सितंबर 2009

कला saskriti

दोस्तों,

कुछ निजी परेशानी के चलते नियमित मुलाकात बातचीत में व्यवधान उत्पन्न हुआ। क्षमा चाहता हूं। एक बार फिर कुछ नये जोश और उत्साह के साथ आपके बीच उपस्थित हूं।
संस्कृति संचालनालय का कार्यालय जल्द ही बदलेगाभोपाल की सांस्कृतिक गलियारों में कई छोटी बड़ी खबरें हैं जिनमें एक खबर है कि संस्कृति संचालनालय का कार्यालय बहुत जल्द राज्य पुरातत्व के कार्यालय में चला जाएगा। राज्य पुरातत्व का कार्यालय बाणगंगा पर है जिसके आसपास जनसम्पर्क संचालनालय, मघ्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी तथा स्वराज संस्थान का कार्यालय है। शिफ्टिंग की पक्की तारीख तो अभी तय नहीं है लेकिन जो कवायद चल रही है, उसके अनुसार मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस एक नवम्बर के पहले पहले तक संस्कृति संचालनालय अपने पुरानी जगह को छोड़ देगा।

शनिवार, 22 अगस्त 2009

रचना आमंत्रित

मासिक पत्रिका समागम के सितम्बर 2009 के लिये आमंत्रणभोपाल। मीडिया, संस्कृति एवं साहित्य पर एकाग्र भोपाल से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका समागम का सितम्बर 2009 का अंक उन शब्दशिल्पियों पर केन्द्रीत है जो अखिल भारतीय प्रशासनिक, पुलिस एवं अन्य सेवाओं में होने के बाद भी निरंतर सक्रिय रहते हैं। हमने ऐसे कुछ गंभीर शब्दशिल्पियों की तलाश की है। संभव है कि कुछ नाम छूट रहे हों। आपकी जानकारी में ऐसे शब्दशिल्पी हों तो कृप्या अविलम्ब उनकी सूचना दें अथवा उनके बारे में सचित्र विवरण भेजें। इस हेतु आखिरी तिथि 05 सितम्बर 2009 है। डाक से रचना भेजने का पता है - सम्पादक समागम, 3, जूनियर एमआईजी, द्वितीय तल, अंकुर कॉलोनी, शिवाजीनगर, भोपाल-16 या मेल कर सकते हैं e-mail: k.manojnews@gmail.com

शुक्रवार, 21 अगस्त 2009

कला और संस्कृति

कलानगरी भोपाल में उठापटक जारीव्यंग्यकार शरद जोशी भोपाल के हैं और उन्होंने मध्यप्रदेश शासन के सम्मानों पर टिप्पणी करते हुए कोई दो दशक पहले कहा था कि भोपाल स्टेशन से गुजरते हुए डर लगता है कि कहीं कोई रोक कर सम्मानित न कर दे लेकिन इन दशकों में समय ने करवट ली है और अब लोग सम्मानित होने के लिये लाॅबिंग करने लगे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। अकादमी और परिषदों में बैठनेे के लिये संघ से जुड़ी पृष्ठभूमि की तलाश की जा रही है। हाल ही में विवाद में आये उस्ताद अलाउद्दीन खा संगीत अकादमी के मुखिया को जाना पड़ा। अब उनके दावेदारों की सूची लम्बी है। नये मुखिया के आगमन की तैयारिया में प्रतीक्षारत अकादमी ने पूरे भवन को चकाचक करने का फैसला कर लिया है और इस क्रम में पलनीतकरजी के रवाना होते ही सफाई शुरू करा दी है।
भटनागर अब कलावार्ता मेंराजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों के कारण रचनाकर्म से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और इसका ताजा उदाहरण कथाकार हरि भटनागर और आनंदप्रकाश सिन्हा हुए हैं। भटनागर हिन्दी साहित्य अकादमी की पत्रिका साक्षात्कार के लम्बे समय से संपादक थे। अचानक उन्हें हटाकर कलावार्ता का संपादक बना दिया गया है। इसी तरह कलावार्ता का काम देख रहे सम्पादक आनंदप्रकाश सिंहा को हटाकर साक्षात्कार का सम्पादक बना दिया गया है। इस बदलाव से पत्रिका के मिजाज में बदलाव हो न हो लेकिन सम्पादकों के तेवर जरूर बदले हुए हैं।

सोमवार, 17 अगस्त 2009

नुक्ताचीनी

आतंकवाद और जमाखोरों की खबर को अधिक जगह
आज 18 अगस्त 09 के अखबारों में जमाखोरों पर कार्यवाही, आतंकी हमले की साजिश का प्रधानमंत्री का अंदेशा आज के अखबारों की खबर महत्वपूर्ण है। नयी बिजली दरों पर एक खास खबर पत्रिका ने प्रकाशित की है जिसमें बताया गया है कि हाॅस्टल में जलने वाली बिजली की दरें घरेलू बिजली की दरों से कम है। नईदुनिया की खास खबर में छोटी झील में मछली पकड़ने के लिये जहरीली दवा डालने का खुलासा किया गया है। वार्ड आरक्षण पर पत्रिका का शीर्षक आधी आबादी के नाम आधा शहर बेहद खूबसूरत और पठनीय है।
दैनिक भास्कर की लीड खबर जमाखोरों पर की जा रही कार्यवाही पर है वहीं दूसरी लीड प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह के उस बयान को लिया गया है जिसमें आतंकी हमले की साजिश की बात कही गई है। इसके अलावा स्वाइन फ्लू से निपटने के लिये खरीदी पर एक खबर, सूखा से निपटने के लिये मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान द्वारा मांगी गई मदद एवं आतंकवाद से निपटने के लिये मुख्यमंत्री का केन्द्र से साथ देने का आग्रह के अलावा राजस्थान में वसुंधरा राजे के इस्तीफा नहीं देने और विधायकांे का साथ देने की खबर है। पहले पन्ने की एंकर स्टोरी नरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार की है। शहर के पन्नों पर वार्ड आरक्षण की खबर प्रमुख है।
नवदुनिया में वार्ड आरक्षण की खबर को प्रमुखता दी गई है। जमाखोरों पर कार्यवाही के संदर्भ में एक खबर शक्कर के दामों में कम होने की पहले पन्ने पर है। नवदुनिया के ही व्यापार पेज में शक्कर के दामों में वृ़िद्ध की खबर है। पहले पन्ने और व्यापार पेज की खबरें विरोधाभाषी हैं।
राज एक्सप्रेस की लीड खबर आतंकवाद पर है। इसके अलावा स्वाइन फ्लू और जसवंतसिंह की नयी किताब पर जिन्ना विवाद को प्रमुखता से दिया गया है। स्थानीय अखबारों में राज एक्सप्रेस के खबर का चयन एकदम भिन्न दिखता है जो अखबार को पठनीय बनाता है। आज की एक खास खबर मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी बिजली बचत के लिये एयरकंडीशनर के उपयोग पर रोक नहीं लगने की है।
पत्रिका की खास खबर बिजली के दरों को लेकर है। आम आदमी से जुड़ी खबर होने के नाते पाठकांे को यह रूचेगी। आतंकी साजिश के प्रधानमंत्री के बयान को प्रमुखता दिया गया है। वार्ड आरक्षण पर दूसरी लीड खबर की हेडिंग पत्रिका ने सबसे अच्छी लगायी है और लिखा है आधी आबादी के नाम आधा शहर।
सम्पादकीय टिप्पणीभास्कर और नवदुनिया ने शाहरूख के मुद्दे पर संपादकीय लिखा है। दोनों ही अखबारों ने अप्रत्यक्ष रूप् से अमेरिकी कार्यवाही को गलत नहीं कहा है बल्कि संपादकीय में कहा गया है कि भारत में भी इसी तरह कड़ाई से जांच की जानी चाहिए। संपादकीय में केन्द्रीय मंत्री अम्बिका सोनी की प्रतिक्रिया की भी हल्की सी आलोचना की गई है। पत्रिका की सम्पादकीय स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम संदेश में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह द्वारा जलसंरक्षण के लिये कही गई बातों पर है। राजएक्सप्रेस ने सम्पादकीय में आतंकवाद एवं जमाखोरी पर टिप्पणी लिखी है।
राहत की खबर को प्रमुखता

स्वाधीनता दिवस के अवकाश के बाद राजधानी भोपाल से 17 अगस्त को प्रकाशित अखबारों में खबरांे को पिछले दिनों की अपेक्षाकृत ज्यादा जगह मिली है। आज अखबारों में विज्ञापन का दबाव थोड़ा कम है लेकिन मान्यता के अनुरूप् साठ-चालीस के मापदंड को अभी भी अनदेखा किया जा रहा है। सभी अखबारों ने स्वाइन फ्लू नहीं होने की खबर देकर आम आदमी को राहत दी है तो नवदुनिया ने मंदी में रोजगार के अवसर की खास खबर प्रकाशित की है।

दैनिक भास्कर भोपाल में लीड खबर स्वाइन फ्लू से संबंधित है। इस खबर से लोगों को राहत मिलेगी कि भोपाल में तो स्वाइन फ्लू का अंदेशा है ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश में भी इसका असर नहीं दिख पाया है। यह जनसामान्य के हित की बड़ी खबर है जो लोगों को राहत दे गयी। इसी तरह पत्रिका ने स्वाइन फ्लू की खबर को हाइलाईट किया है। नवदुनिया में स्वाइन फ्लू की खबर को अपेक्षाकृत छोटा दिया गया है वहीं राजएक्सप्रेस ने भी स्वाइन फ्लू की खबर को प्राथमिकता दी है।

दैनिक भास्कर की अन्य खबरों में प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संदेश में पानी बचाओ को राष्ट्रीय नारा बनाने की अपील को हाईलाईट करते हुए सेकंड लीड लिया गया है। नवदुनिया ने प्रधानमंत्री के त्वरित न्याय वाले पक्ष को हाईलाइट किया है जबकि पत्रिका ने प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संदेश को भीतर के पृष्ठांे पर दिया है।
दैनिक भास्कर की अन्य प्रथम पृष्ठ पर अन्य प्रमुख खबरों में जमाखोरों पर प्रहार, शाहरूख का अमरीका जाने से तौबा, वसंुधरा इस्तीफा देने तैयार, एलप्स पर भारतीय क्रिकेटरों की विजय की खबरें हैं तो नवदुनिया ने मंदी में रोजगार की संभावनाओं पर लीड खबर देकर एक बड़े युवा वर्ग में राहत की आस जगायी है। नवदुनिया की अन्य प्रमुख खबरों में शक्कर की जब्ती, बारिश की संभावना, वसंधुरा का इस्तीफे के लिये राजी होना, द्रविड़ की वापसी आदि है। पत्रिका में बेइमान आवासीय समितियों पर कार्यवाही किये जाने के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान की चेतानी, शक्कर की कीमतें नहीं बढ़ने देने का वायदा और द्रविड़ की वापसी मुख्य है। राज एक्सप्रेस में भी यही खबरें पहले पन्ने पर हैं।

सम्पादकीय टिप्पणीभास्कर ने प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम दिये गये संदेश पर संपादकीय लिखा है जिसका शीर्षक है लालकिले से पानी की गूंज। जलसंकट हमारे समय की महती समस्या है और जब प्रधानमंत्री कोई आह़वान कर रहे हैं तो इस पर गौर किया जाना उचित ही है।

पत्रिका ने द्रविड़ की टीम में वापसी पर सम्पादकीय लिखा है। यह सम्पादकीय खेलप्रेमियों को अच्छा लगेगा।
नवदुनिया ने संपादकीय में प्रधानमंत्री के भाषण को लिया है और सम्पादकीय में यह स्मरण कराया गया है कि वर्ष में एक दिन देश के प्रधानमंत्री देश की जनता से सीधे हिन्दी में संवाद करे, यह परम्परा पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी जिसका निर्वहन निरंतर हो रहा है। सम्पादकीय में पूर्व प्रधानमंत्री देवेगोैड़ा का स्मरण भी किया गया है जिन्हें देश की जनता को संबोधित करने के लिये हिन्दी सीखना पड़ा था। वर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह के देश के नाम संदेश को सरकार का रिपोर्ट कार्ड बताया गया है और लिखा गया है कि संदेश के साथ भविष्य के कुछ इरादे भी दिखे।

रविवार, 16 अगस्त 2009

पत्रकारों की बेकारी पर खामोशी कब तक?

एक तरफ मीडिया का विस्तार हो रहा है और दूसरी तरफ मंदी के बहाने पत्रकारों की लगातार छंटनी की जा रही है। जिन संस्थानों में छंटनी नहीं किया जा रहा है उन्हें अपने शहर से इतनी दूर कर दिया जा रहा है कि वे खुद होकर नौकरी छोड़ दें. हाल ही में खबर आयी है कि हमारे बीच के एक वरिष्ठ पत्रकार इलाज के अभाव में अकाल मौत के शिकार हो गये. समाज के लिये अपना सर्वस्व त्याग करने वाले पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार कब तक होता रहेगा. क्या इस तरह पत्रकारों की नौकरी जाने से रोकने के लिये कोई एकजुट प्रयास नहीं किये जा सकते हैं. आप भी इस बारे में सोचते होंगे. किसी साथी की नौकरी जाने पर आप भी दुखी होते होंगे. संभव है कि जो साथी असमय नौकरी छूट जाने की वजह से बेकार हों, उनमें से एक आप भी हों. इस स्थिति में हम सब क्या कर सकते हैं, यह सोचना होगा. क्या आप अपनी खामोशी तोड़ना चाहेंगे? अविलम्ब इस बारे में अपनी राय रखें.

शनिवार, 15 अगस्त 2009

नुक्ताचीनी

साथियों,

आने वाले सोमवार 17 अगस्त से रिपोर्टर का नया काॅलम नुक्ताचीनी का प्रकाशन आरंभ होगा. नुक्ताचीन में भोपाल से प्रकाशित प्रमुख हिन्दी दैनिकों के खबरों का विश्लेषण किया जाएगा. इस स्तंभ का मकसद किसी आलोचना का नहीं बल्कि अपनी बात रखने का होगा. उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा प्रयास अच्छा लगेगा. आग्रह है कि अपनी प्रतिक्रिया से जरूर अवगत करायें. पक्ष और विपक्ष दोनों का हम तहेदिल से इस्तकबाल करेंगे.

लिव-इन रिलेशनशिप : स्वंतत्रता नहीं, स्वच्छंदता

लिव-इन रिलेशनशिप : स्वंतत्रता नहीं, स्वच्छंदता  प्रो. मनोज कुमार लिव-इन रिलेशनशिप  क्या भारतीय समाज और उसकी व्यवस्था के अनुरूप है? क्या इस...