बुधवार, 16 जून 2021
मेरठ से पहले विद्रोह हरियाणा में हुआ- प्रो. पुनिया
बुधवार, 9 जून 2021
ग्रामीण, किसान और आदिवासी समाज के उत्सर्ग का उल्लेख जरूरी- डॉ झा
आजादी का अमृत महोत्सव संगोष्टी
शनिवार, 5 जून 2021
पांच नहीं, मनुष्य अपने समाथ्र्य के अनुरूप अधिकाधिक पेड़ लगाये- शर्मा
विश्व पर्यावरण दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी
महू। ‘पांच पेड़ लगाओ का संकल्प गलत है बल्कि प्रत्येक मनुष्य अपने सामथ्र्य के अनुरूप अधिकाधिक पौधा लगाये. प्रकृति ने मनुष्य को समाथ्र्य दिया है कि वह अपने कार्यों से प्रकृति का ऋण चुकाये.’ यह बात पद्यश्री से सम्मानित श्री महेश शर्मा पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि की आसंदी से बोल रहे थे. संगोष्ठी का विषय ‘प्री एंड पोस्ट कोविड-19 : इम्पेक्ट ऑफ एनवायरमेंटएंड बॉयोडॉयवर्सिटी’. संगोष्ठी का आयोजन डॉ. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू, स्कूल ऑफ सोशल साइंस, यूजीसी स्ट्राइड प्रोजेक्ट, नेशन एकेडमी ऑफ साइंस चेप्टर, भोपाल एवं सोसायटी ऑफ लाइफ साइंसेंस के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था. मुख्य अतिथि श्री शर्मा ने कहा कि जो रचा गया है, वह मनुष्य के पुरुषार्थ का परिणाम है और जो खराब हो रहा है, वह उसके भीतर का लालच है. उन्होंने मनुष्य एवं पशु की खासियत को स्पष्ट करते हुए कहा कि पशु उपभोग के लिए होता है लेकिन मनुष्य परामर्थ के लिए होता है. मनुष्य समस्या पैदा करता है, पशु नहीं. उन्होंने कहा कि आप कहीं भी पेड़ लगायें, कहीं भी जलसंरक्षण करें, वह पूरे समाज के लिए उपयोगी होता है. उन्होंने आयोजन के लिए धन्यवाद करते हुए कहा कि आज का दिन परम्परा के हस्तांतरण करने का दिन है.
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो. अखिलेश पांडे ने कहा सुखमय जीवन के लिए संस्कृति और प्रकृति में संतुलन आवश्यक है. संस्कृति और प्रकृति में असंतुलन से विनाश की स्थिति बनती है. उन्होंने भविष्य के खतरे के प्रति सचेत करते हुए कहा कि पर्यावरण में जो सुधार दिख रहा है, वह स्थायी नहीं है. बल्कि इसे स्थायी करने के लिए हमारी जीवनशैली में परिवर्तन लाना होगा. उन्होंने कोरोना महामारी एवं फंगस डिसीस पर विस्तार से अपनी बात रखी. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर यूसी श्रीवास्तव ने कहा कि कोरोना महामारी नई नहीं है. यह बार बार रूप बदल कर आता है. 1960 में अलग अलग नाम से आया था जिसे आज हम कोविड-19 के नाम से जान रहे हैं. उन्होंने कहा कि कोविड-19 की दूसरी लहर खतरनाक है. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन से जो हमें जलवायु सुधार का लाभ दिख रहा है, वह शॉर्टटर्म है लेकिन भविष्य में यह नुकसानदेह होगा. उन्होंने कहा कि रिसर्च लैब बंद है तो रिसर्च वर्क नहीं हो पा रहा है. जमीनी कार्य थम गया है. उन्होंने कहा कि एक संतुलित समाज के लिए संतुलन की जरूरत होती है. उन्होंने पर्यावरण एवं जैव विविधता के संदर्भ में विस्तार से अपनी बात रखी.
बुधवार, 2 जून 2021
पूर्वाग्रह से ग्रसित इतिहास लेखन बड़ी चुनौती- प्रो. चतुर्वेदी
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गुरुवार, 27 मई 2021
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हिन्दी पत्रकारिता दिवस का गौरव
गुरुवार, 6 मई 2021
आपदा में अवसर के खिलाफ संकट में समाधान की जरूरत
मनोज कुमार
सोमवार, 3 मई 2021
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मनोज कुमार कोविड की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। कल क्या होगा, किसी को खबर नहीं है लेकिन डर का साया दिन ब दिन अपना आकार बढ़ा रहा है। कोरो...